सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट और लेबर कोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया है, जिसमें एक कर्मचारी को बकाया वेतन के साथ काम पर वापस रखने को कहा गया था. कोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि जो कर्मचारी बिना इजाजत के काम से गैर-हाजिर रहा और अपने दावों को साबित नहीं कर पाया, उसे राहत नहीं दी जा सकती है. जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने यह फैसला दिया है.
पता बदलने की जानकारी देना कर्मचारी की जिम्मेदारी: सुप्रीम कोर्ट
अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि कंपनी नोटिस उसी पते पर भेजेगी, जो कर्मचारी ने अपने रिकॉर्ड में दर्ज कराया है. यदि कर्मचारी ने पता बदलने की जानकारी कंपनी को नहीं दी, तो बाद में वह नोटिस नहीं मिलने का हवाला देकर राहत नहीं मांग सकता. कोर्ट ने कहा कि पता बदलने की जानकारी देना पूरी तरह से कर्मचारी की जिम्मेदारी है और अपनी ही लापरवाही का फायदा उठाकर कोई भी कानूनी राहत नहीं मांगी जा सकती.
साथ ही, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि बिना अनुमति लंबे समय तक ड्यूटी से अनुपस्थित रहने वाले कर्मचारी को केवल मौखिक दावों के आधार पर राहत नहीं दी जा सकती.
क्या है पूरा मामला? 2012 से चल रहा था विवाद
यह विवाद तब शुरू हुआ जब अगस्त 2006 से मोल्डर के तौर पर काम कर रहे कर्मचारी अर्जुन गुप्ता ने 14 मई 2012 से काम पर आना बंद कर दिया. कंपनी का दावा था कि वह बिना किसी सूचना के अनुपस्थित रहे और 18 मई 2012 को उनके आखिरी ज्ञात स्थायी पते पर स्पष्टीकरण मांगने के लिए एक नोटिस भेजा गया था. दूसरी ओर, कर्मचारी अर्जुन गुप्ता का आरोप था कि जून 2012 में ड्यूटी पर लौटने की कोशिश करने के बाद उन्हें गैर-कानूनी तरीके से नौकरी से निकाल दिया गया था.
लेबर कोर्ट और हाई कोर्ट के फैसलों का सफर
शुरुआत में लेबर कोर्ट ने फरवरी 2022 में कर्मचारी के पक्ष में एकतरफा फैसला सुनाया था. उसके बाद मामला इलाहाबाद हाई कोर्ट पहुंचा और हाई कोर्ट ने मामले पर दोबारा विचार करने के लिए इसे लेबर कोर्ट भेज दिया. जिसके बाद लेबर कोर्ट ने अक्टूबर 2023 में फिर से कर्मचारी के पक्ष में फैसला सुनाया और उससे जुड़े लाभों के साथ नौकरी पर बहाल करने का आदेश दिया.
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बाद में हाई कोर्ट ने भी इस फैसले को बरकरार रखा था, जिसके खिलाफ कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया. अब सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर सुनवाई के बाद हाई कोर्ट और लेबर कोर्ट दोनों के फैसलों को पलट दिया है.
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