फर्जी बीमा पॉलिसी की घटनाएं आए दिन सुनने को मिलती रहती है. लेकिन एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अख्तियार किया है. कोर्ट ने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी के चेयरमैन व प्रबंध निदेशक (सीएमडी) को एक अपराधी मामले में आरोपी बनाने का निर्देश दिया है. साथ ही कोर्ट ने इस फर्जीवाड़े की जांच के लिए एसआईटी के गठन का आदेश दिया है.
जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने यह आदेश दिया है. बीमा कंपनी के अनुसार बीमा पॉलिसी फर्जी थी, लेकिन फिर भी कंपनी आपराधिक कार्रवाई करने में विफल रही. कोर्ट ने कहा कि एक बीमा कंपनी एक बार जब उसे ज्ञात होता है और वह आश्वस्त हो जाती है कि पॉलिसी अमान्य है, तो वे उचित प्राधिकारी को सूचित करने के लिए कानून के तहत बाध्य है.
जानिए पूरा मामला
इसी साल जनवरी 2026 में 12 राज्यों में 100 करोड़ रुपये से अधिक का फर्जी बीमा घोटाला का पर्दाफाश हुआ है. पुलिस ने इस गिरोह के सरगना ओंकारेश्वर मिश्रा और उसके दो साथियों की. संभल, बदायूं, गौतमबुद्ध नगर और वाराणसी स्थित करीब 11.89 करोड़ रुपए की चल-अचल संपत्ति को कुर्क किया है. इस गिरोह के खिलाफ ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के तहत मुकदमा दर्ज कर रखा है. बताया जा रहा है कि इस गिरोह ने न सिर्फ झूठे दस्तावेज बनाए, बल्कि बीमा की रकम हड़पने के लिए हत्या जैसे गंभीर अपराध भी किए.
300 करोड़ से ज्यादा का बीमा घोटाला
ईडी की जांच में सामने आया है कि 300 करोड़ रुपए से अधिक के बीमा घोटाले का पर्दाफाश हुआ है. इस गिरोह ने चार हत्याएं की है. इसके खिलाफ 15 एफआईआर दर्ज है. इसमें 40 लोग अभी तक गिरफ्तार हो चुके है. पुलिस के मुताबिक 50 करोड़ रुपये से अधिक की बीमा राशि हड़पने के लिए विशाल नामक व्यक्ति ने पत्नी और माता-पिता की हत्या कर दी. इसके बाद इन हत्याओं को हादसा दिखाकर करोड़ों का क्लेम ले लिया. हापुड़ पुलिस ने 28 सितंबर 2025 को इस मामले में मास्टरमाइंड सहित दो और को गिरफ्तार किया था. दावा है कि इस गैंग ने सबसे बड़ा बीमा फ्रॉड किया है.
इस घोटाले में शामिल लोग गरीब और बीमार व्यक्तियों का बीमा कराकर उनकी मौत के बाद पैसे हड़प लेते थे, या फिर बीमा कराने के बाद उनकी हत्या कर सड़क हादसा बताकर क्लेम का पैसा निकाल लेते थे.
रिलायंस के खिलाफ मामला दर्ज
हालही में सीबीआई ने रिलायंस कम्युनिकेशन लिमिटेड, इसके प्रमोटर अनिल अंबानी और कुछ अज्ञात सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है. यह मामला भारतीय जीवन बीमा निगम को कथित तौर पर 3,750 गलत तरीके से नुकसान पहुचाने का आरोप है. सीबीआई ने एलआईसी की ओर से मिली शिकायत के आधार पर यह मामला दर्ज किया है. इसमें साजिश, धोखाधड़ी, पैसों की हेराफेरी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत गंभीर आरोप लगाए गए हैं.
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दर्ज शिकायत में कहा गया है कि आरकॉम और उसके प्रबंधन ने कंपनी के वित्तीय स्वास्थ्य, सुरक्षा और परिसंपत्ति कवर के बारे में झूठे दावे किए. इन भ्रामक जानकारियों के आधार पर एलआईसी को 4500 करोड़ रुपए के गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर खरीदने के लिए धोखे से प्रेरित किया गया. सीबीआई के मुताबिक ऑडिट रिपोर्ट में बताया गया है कि आरकॉम और उसके प्रबंधन ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों से जुटाए गए धन का दुरुपयोग किया. इस मामले में एलआईसी की शिकायत के बाद एक फॉरेंसिक ऑडिट कराया गया था. 15 अक्टूबर 2020 को आई बीडीओ इंडिया एलएलपी की ऑडिट रिपोर्ट में कई खुलासे हुए है.
-भारत एक्सप्रेस
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