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तारीख पर तारीख… और टूट गई सांस! कैंसर पीड़िता की मौत पर सुप्रीम कोर्ट गंभीर, अदालतों के लिए बनेंगे नियम

सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं में होने वाले ब्रेस्ट कैंसर की जीवन रक्षक दवाओं की आसान उपलब्धता और जीवन बचाने वाले इलाज से जुड़े मामलों में देरी को लेकर स्वतः संज्ञान लिया है.

SUPREME COURT

सुप्रीम कोर्ट महिलाओं को होने वाले ब्रेस्ट कैंसर की जीवन रक्षक दवाओं की पहुच आसानी से सुनिश्चित करने लेकर स्वतः संज्ञान लिया है. सुप्रीम कोर्ट जीवन बचाने वाले इलाज से जुड़े अनुच्छेद 21 के मामलों में देरी की जांच करेगा. सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने केंद्र सरकार और ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया को नोटिस जारी है कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जीवन और स्वतंत्रता से जुड़े मामलों के समयबद्ध निपटारे के लिए पूरे देश के लिए दिशा निर्देश जारी करेगा.

सुप्रीम कोर्ट ने इसको लेकर दिशा निर्देश जारी करेगा. सीजेआई ने एक चिट्ठी के आधार पर स्वतः संज्ञान लिया है. यह चिठ्ठी कैंसर की दवाओं की कीमत कम करने की मांग को लेकर लिखी गई थी. केरल हाई कोर्ट में 21 जनवरी 2023 के बाद 57 बार केस को लिस्ट किया गया लेकिन सुनवाई नही हुई और इसी दौरान महिला की मौत हो गई. यह मामला केरल हाई कोर्ट में जून 2022 से लंबित है. ब्रेस्ट कैंसर से जूझ रही एक महिला ने महंगी दवा की कीमत कम करने के लिए याचिका दायर की थी. लेकिन हाईकोर्ट काफैसला आने से पहले ही उसकी मौत हो गई.

महिला की याचिका पर जल्द सुनवाई की मांग

हालांकि महिला की याचिका पर जल्द सुनवाई की मांग को लेकर ज्योत्सना सिंह और केएम गोपा कुमार ने केरल हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा था और इसकी कॉपी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और सीजेआई सूर्यकांत को भेजा था. जिसको सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के लिए शुक्रवार को सूचीबद्ध किया है. दवाओं तक लोगों की पहुच सुनिश्चित करने के लिए काम करने वाले ‘वर्किंग ग्रुप ऑन एक्सेस टू मेडिसिन्स’ ने अब सीजेआई सूर्यकांत को पत्र लिखा है. इसने सीजेआई से अनुरोध किया है कि मामले की सुनवाई जल्द करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं ताकि जिन्हें यह दवा तुरंत चाहिए उन मरीजों को न्याय मिल सके. यह समूह मरीजों के अधिकारों को लेकर काम करता है.

इस समूह में इस तरह के संस्था से जुड़े लोग, मरीज समूहों, सामाजिक संगठनों, शिक्षाविदों और वकीलों से मिलकर बना है. सीजेआई को भेजे गए पत्र में स्तन कैंसर से जुड़े आंकड़े और दवाओं की कीमतों का खासकर उल्लेख किया गया है.

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