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ED की शक्तियों और सीमाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर, 31 जुलाई को होगी सुनवाई

Enforcement Directorate News: ED की शक्तियों और सीमाओं को लेकर दायर पुनर्विचार याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में अब 31 जुलाई को सुनवाई होगी. यहां जानिए पूरा मामला…

Supreme Court
Vijay Ram Edited by Vijay Ram

प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत प्रवर्तन निदेशालय के शक्तियों और सीमाओं को लेकर दिए गए फैसले के बाद दायर पुर्नविचार याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 31 जुलाई को सुनवाई करेगा.

जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ के समझ मेंशन कर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि जल्द सुनवाई कर ली जाए, जिसपर कोर्ट ने कहा कि यह पूरे सप्ताह मिसलेनियस है. लिहाजा 31 जुलाई को सुनवाई संभव है. वही सिब्बल ने सुनवाई को टालने की मांग की जिसपर कोर्ट ने कहा कि आप 31 जुलाई को अपनी किस्मत आजमाइए. तीन जजों की बेंच याचिका पर सुनवाई करेगी.

पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई कर रहा कोर्ट

कोर्ट कार्ति चिदंबरम सहित अन्य की ओर से दायर पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई कर रहा है. पिछली सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि जिरह की तैयारी के लिए समय चाहिए. जिसके बाद कोर्ट ने 2 सप्ताह का समय दे दिया था. 2022 के फैसले में विजय मदनलाल चौधरी मामले में गिरफ्तारी, जब्ती, निर्दोष होने का अनुमान, कड़ी जमानत की शर्तों आदि से संबंधित पीएमएलए के प्रावधानों के संवैधानिक वैधता को कोर्ट ने बरकरार रखा था.

ECIR की आपूर्ति अनिवार्य नहीं

कोर्ट ने यह माना था कि पीएमएलए कार्यवाही के तहत प्रवर्तन सूचना रिपोर्ट यानी ECIR की आपूर्ति अनिवार्य नहीं है, क्योंकि ECIR एक आंतरिक दस्तावेज है और इसे प्रथम सूचना रिपोर्ट के बराबर नही किया जा सकता है. कोर्ट ने दो मुद्दों की पहचान की थी, जिन पर प्रथम दृष्टया विचार करने की आवश्यकता है. याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा था कि फैसले पर पुनर्विचार की आवश्यकता है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वह प्रत्येक पक्ष को अपनी दलीलें पेश करने और मामले से संबंधित कानूनी मुद्दों पर विचार करने का पर्याप्त अवसर देगी. इससे पहले सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने फैसले के पुनर्विचार का विरोध किया था और कहा कि पीएमएलए एक स्वतंत्र अपराध नहीं है और पीएमएलए को वित्तीय कार्रवाई कार्य बल द्वारा जारी निर्देशों के अनुरूप विधायिका द्वारा तैयार किया जाता है.

याचिकाओं में धन शोधन निवारण अधिनियम के प्रावधानों को चुनौती दी गई थी. याचिकाओं में पीएमएलए के तहत अपराध की आय की तलाशी, गिरफ्तारी, जब्ती, जांच और कुर्की के लिए ईडी को उपलब्ध शक्तियों के व्यापक दायरे को चुनौती दी गई. इसमें कहा गया है कि ये प्रावधान मौलिक अधिकारों का हनन करते हैं.



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