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फिल्म के रिलीज पर फिलहाल कोई रोक नही: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म ‘उदयपुर फाइल्स’ की रिलीज पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि फिल्म पर विवादों से उसे और प्रचार मिला है. याचिकाकर्ताओं को हाईकोर्ट में अपील करने का निर्देश दिया गया है.

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सुप्रीम कोर्ट फिल्म उदयपुर फाइल्स को लेकर दायर याचिकाओं को निपटारा कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि फिल्म के रिलीज पर फिलहाल कोई रोक नही है. जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह फैसला दिया है. कोर्ट सभी याचिककर्ताओ की ओर से हाई कोर्ट में याचिका दायर करने को कहा है. कोर्ट हाई कोर्ट से दायर याचिकाओं पर सोमवार यानी 28 जुलाई को सुनवाई करें. केंद्र सरकार की ओर से गठित समिति के 6  दृश्यों को हटाने का सुझाव दिया और डिस्क्लेमर में बदलाव कर सुझाव दिया था. फिल्म निर्माता निर्देशक की ओर से पेश वकील गौरव भाटिया ने इसका पालन करने का आश्वासन दिया.

कोर्ट की तीखी टिप्पणी

हालांकि इस फिल्म का मुस्लिम पक्षकारों द्वारा विरोध किया जा रहा है. जिसको जमीयत उलेमा ए हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी सहित अन्य ने आरोप लगाया है कि फिल्म मुस्लिम समुदाय को बदनाम करती है. मामले की सुनवाई के दौरान जमीयत उलेमा ए हिंद की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा केंद्रीय फिल्म प्रमाणन की जिस समिति ने फिल्म रिलीज करने की मंजूरी दी है, उसके कई सदस्य एक राजनीतिक दल क सदस्य है. इसपर जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि ऐसा सभी सरकारों में होता है, उनकी नियुक्तियों को चुनौती नही दी जा सकती है. जबकि जस्टिस बागची ने कहा कि इसमें कुछ गलत नही है सरकार हमेशा सलाहकार समिति रख सकती है. मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत ने निर्माता के वकील से कहा इन सभी विवादों ने फिल्म को अच्छी पब्लिसिटी दिलाई है.
कोर्ट ने कहा कि जितनी ज्यादा पब्लिसिटी होगी, उतने जयादा लोग देखेंगे. मुझे नही लगता कि आपको नुकसान होगा. कोर्ट ने यह तब कहा जब याचिकाकर्ता के वकील गौरव भाटिया ने कहा कि सेंसर बोर्ड और सरकार की मंजूरी के बावजूद मेरा सारा जीवन भर का निवेश बर्बाद हो गया. इससे पहले जस्टिस सूर्यकांत ने कहा था कि कोई भी उपन्यास लिख सकता है, कहानी लिख सकता है, फिल्म बना सकता है.
अगर हर वो चीज दिखाई जाए, जिससे किसी की पहचान हो या जिससे कोई जुड़ा हो, तो इससे बहुत भ्रम पैदा होगा. फिल्म देखना या न देखना समाज का अधिकार है. लोगों को उनकी पसंद की फिल्म देखने की अनुमति देकर भी आपके अधिकार की रक्षा की जा सकती हैं. केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि फिल्में वास्तविक जीवन पर भी बनती है.



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