Supreme Court ने बिहार के पूर्व विधायक अविनाश कुमार सिंह को सरकारी आवास पर लंबे समय से कब्जा करने पर नाराजगी जताई है. सीजेआई बी आर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने 20 लाख से अधिक का किराया वसूलने के पटना हाई कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश को सही ठहराया है.
मामले की सुनवाई के दौरान सीजेआई बी आर गवई ने टिप्पणी करते हुए कहा कि कोई भी व्यक्ति अनिश्चितकाल तक सरकारी आवास पर कब्जा नहीं बनाए रख सकता. जिसके बाद याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने याचिका को वापस ले लिया है. साथ कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता को कानून में जो विकल्प मौजूद है, उसको इस्तेमाल करने की अनुमति दी जाती है. अविनाश कुमार सिंह ने पटना हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी.
2006 से 2015 तक रहा कब्जा
बता दें कि अविनाश कुमार सिंह वर्ष 2006 में पुनः विधायक चुने गए, उसके बाद उन्हें सरकारी आवास आवंटित किया गया. जिसका इस्तेमाल वर्ष 2015 तक करते है. नवंबर 2015 में बिहार सरकार ने सिंह को आवास खाली करने का नोटिस जारी किया, ताकि अन्य मंत्री को आवास आवंटित किया जा सके. लेकिन उन्होंने मकान खाली नही किया. मामला हाई कोर्ट पहुचा और हाई कोर्ट ने सिंह को 20 लाख रुपये, भरने का निर्देश दिया.
कोर्ट ने कहा था कि जैसे ही कोई विधायक पद से इस्तीफा देता है या उस पर प्रभावी रूप से होना बंद कर देता है, उसे उस दिन से ही सरकारी आवास को छोड़ देना चाहिए था. हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया था कि सिंह ने विधायक पद से इस्तीफा देने के बाद सरकारी आवास खाली नही किया था. जिसपर सिंह ने 2008 के एक अधिसूचना के हवाला दिया, जिसमें राज्य विधानमंडल अनुसंधान और प्रशिक्षण ब्यूरो के सदस्यों को विधायकों के समान सुविधाएं मिलने का उल्लेख किया था.
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-भारत एक्सप्रेस
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