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ऑनलाइन गेमिंग कानून को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 26 नवंबर को करेगा सुनवाई

ऑनलाइन गेमिंग कानून को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 26 नवंबर को सुनवाई करेगा. जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ सुनवाई करेगी.

Edited by Vaibhav Gupta

ऑनलाइन गेमिंग कानून को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 26 नवंबर को सुनवाई करेगा. जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ सुनवाई करेगी. कोर्ट ने केंद्र सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए समय दे दिया है.

याचिकाओं को SC में ट्रांसफर की मांग

इससे पहले कोर्ट ने केंद्र सरकार की मांग पर तीन हाई कोर्ट से इससे जुड़े मामलों को अपने पास ट्रांसफर कर लिया था. कोर्ट ने कर्नाटक, दिल्ली और मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से ऑनलाइन गेमिंग अधिनियम को चुनौती देने के मामले में अपने पास ट्रांसफर किया था. हाई कोर्ट को सारा रिकॉर्ड ट्रांसफर करने के निर्देश दिए गए थे.

केंद्र सरकार द्वारा दायर याचिका में मांग की गई थी कि प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग एक्ट 2025 (Online Gaming Act 2025) के खिलाफ देशभर के विभिन्न हाईकोर्ट्स में दायर सभी याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर की मांग की गई थी. केंद्र सरकार का कहना है कि एक ही मामलों को लेकर कई अदालतों में अलग-अलग कार्यवाही होने से परस्पर विरोधी फैसले आने की उम्मीद है.

कितने साल की सजा और कितना जुर्माना?

बता दें कि केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए कानून के तहत सभी ऑनलाइन मनी गेमिंग सेवाओं पर प्रतिबंध लगेगा. नए कानून में मनी गेम का विज्ञापन करने पर दो साल तक कि कैद और 50 लाख रुपए तक का जुर्माना लगेगा. जबकि मनी गेम से संबंधित वित्तीय लेनदेन को बढ़ावा देने पर तीन साल तक कि कैद और एक करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा.

बार-बार अपराध करने पर तीन से पांच साल की कैद और दो करोड़ रुपए तक जुर्माना लगाया जाएगा. यह बात महत्वपूर्ण है कि विधेयक में प्रमुख धाराओं के तहत अपराधों को संज्ञेय और गैर जमानती बनाने की मांग की गई है.

इस विधेयक में ई-स्पोर्ट्स, शैक्षणिक खेल और सामाजिक खेल सहित ऑनलाइन खेल क्षेत्र को बढ़ावा देने, उसे विनियमित करने और इसके विकास तथा विनियमन के लिए एक प्राधिकरण की स्थापना का भी प्रावधान किया गया है. इसके अलावे विधेयक में किसी कंप्यूटर, मोबाइल उपकरण या इंटरनेट के माध्यम से ऑनलाइन मनी गेम के प्रस्ताव, संचालन, सरलीकरण, विज्ञापन, प्रचार और भागीदारी को निषिद्ध किया गया है.

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-भारत एक्सप्रेस



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