सुप्रीम कोर्ट पूर्व सीजेआई बी आर गवई पर एक वकील राकेश किशोर द्वारा जूता फेंकने के मामले में चिंता व्यक्त की है. सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है.
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि इस तरह की घटनाओं पर रोकथाम के लिए दिशानिर्देश जारी करेगा. मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि वह सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के साथ मिलकर संयुक्त सुझाव पेश करेगी, ताकि ऐसी घटनाओं की रिपोर्टिंग को रेगुलेट किया जा सके. कोर्ट जनवरी में इस मामले में अगली सुनवाई करेगा.
पिछली सुनवाई में सीजेआई सूर्यकांत ने कहा था कि वह राकेश किशोर के खिलाफ कार्रवाई करने के पक्ष में नही है, क्योंकि पूर्व सीजेआई गवई ने उसे माफ कर दिया था. हालांकि कोर्ट अब भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम और उनकी रिपोर्टिंग/ डिजिटल सर्कुलेशन के नियमन के मुद्दे पर सुनवाई कर रहा है. पिछली सुनवाई में सीजेआई सूर्यकांतने कहा था कि हिंसा को कभी बढ़ावा नहीं दिया जा सकता है. जरा सोचिए जब आप इस तरह की कार्यवाही शुरू करेंगे तो क्या होगा. सोशल मीडिया सब कुछ बिकाऊ हो जाएगा.
बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने दिखाई सख्ती
जस्टिस बागची ने कहा था कि हम अदालतों में अपने व्यवहार के लिए ही जीवित हैं. यही वह भावना है जिसका प्रदर्शन मुख्य न्यायाधीश ने किया था, बस उसे दरकिनार कर दिया. जस्टिस बागची ने कहा था कि हमारे सामने कई महत्वपूर्ण मामले हैं, क्या यह समय बर्बाद नहीं करेगा? इसपर विकास सिंह ने कहा था कि हम जूता फेंकने की घटना का महिमामंडन करने पर लगाम लगाने की मांग कर रहे है. जस्टिस सूर्यकांत ने कहा था कि आप जैसे ही कार्रवाई करेंगे. बता दें कि 6 अक्टूबर को यह घटना हुई थी. जिसको लेकर बार काउंसिल ऑफ इंडिया सहित अन्य ने उसके खिलाफ कार्रवाई करते हुए लाइसेंस को रद्द कर दिया है.
बाद में एक मामले की सुनवाई के दौरान सीजेआई ने इसपर अपनी चुप्पी तोड़ी थी. सीजेआई ने कहा था कि जो कुछ हुआ उससे बहुत स्तब्ध था. अदालत में हुई घटना के बारे में बोलते हुए सीजेआई ने यह भी कहा कि उनके लिए यह भुला दिया गया अध्याय है.
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-भारत एक्सप्रेस
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