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‘दुष्कर्म के लिए एक दिन भी काफी…’, तरुण तेजपाल की याचिका पर 5 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट में तरुण तेजपाल की याचिका पर 5 नवंबर को सुनवाई होगी। गोवा सरकार ने मामले में अपना जवाब दाखिल कर दिया है.

Supreme Court

रेप के मामले में दोषी तरुण तेजपाल और गोवा सरकार की ओर से दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 5 नवंबर को सुनवाई करेगा. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने तेजपाल की ओर से दायर याचिका पर गोवा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दाखिल कर दिया था. कोर्ट 5 नवंबर को मामले में अगली सुनवाई करेगा.

जस्टिस एम. एम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की बेंच दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है. मामले की सुनवाई के दौरान तेजपाल के वकील ने कहा कि उन्हें परिवार के साथ दीवाली मानने दिया जाए. जिसका गोवा सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इसका विरोध किया, जिसके बाद कोर्ट ने मामले की सुनवाई के लिए 5 नवंबर के लिए सूचीबद्ध कर दिया है. पिछली सुनवाई के दौरान तेजपाल की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा था, यह ऐसा मामला है जिसमें हाई कोर्ट ने बरी किए जाने के फैसले को पलट दिया था.

दुष्कर्म के लिए वर्षों तक अपराध होना जरूरी नहीं, एक दिन भी काफी- तुषार मेहता

सिब्बल ने कहा था कि यह फैसला पलटे जाने का मामला है. इसमें अपील का अधिकार है और मैंने सरेंडर कर दिया है. इसपर जस्टिस एम एम सुंदरेश ने कहा था फिलहाल नोटिस जारी करेगा. वही सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था दुष्कर्म वर्षो तक नही होता, एक दिन भी पर्याप्त है. वही वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने सजा की अवधि पर सवाल उठाया, और कहा था कि यह सजा बहुत अधिक है.

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने तरुण तेजपाल को दो सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का निर्देश दिया था. साथ ही कोर्ट ने सरेंडर करने से छूट से संबंधित याचिका को खारिज कर दिया था. कोर्ट ने कहा था कि गोवा हाई कोर्ट द्वारा दोषी ठहराए जाने के खिलाफ दायर अपील पर तभी सुनवाई शुरू होगी जब वह सरेंडर कर देंगे और सरेंडर सर्टिफिकेट जमा कर देंगे.

पिछली सुनवाई के दौरान तरुण तेजपाल की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने सरेंडर करने के लिए छूट मांगी थी कि पहले सुप्रीम कोर्ट में उनकी अपील लिस्ट होनी चाहिए और उस पर सुनवाई होनी चाहिए. सुनवाई के दौरान सिब्बल ने दलील दी थी कि कोर्ट के पास उचित मामले में सरेंडर की जरूरत को खत्म करने और आरोपी के सरेंडर न करने पर भी क्रिमिनल अपील को सूचीबद्ध करने की शक्ति है.

सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने कहा था कि यह घटना वर्ष 2013 की है और तेजपाल करीब 6 महीने को छोड़कर पूरे समय जमानत पर रहे है. उन्होंने यह भी कहा था कि हाई कोर्ट ने सजा सुनाने के साथ ही सजा पर अंतरिम रोक भी लगा रखा है. उन्होंने कहा था कि तेजपाल वरिष्ठ आदमी है. उनके परिवार में उनकी दो बेटियां है. जमानत के दौरान किसी प्रकार का दुर्व्यवहार की शिकायत नही है.



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