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सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं की सुरक्षा और पोर्नोग्राफी पर बैन वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से मांगा जवाब

जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने याचिकाकर्ता से कहा कि आप जिस तरह की सजा की मांग कर रही है. वह बर्बर हो सकती है. कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि वह विचार करेंगे और देखेंगे कि कानून में कहा खामी है.

Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट समाज में महिलाओं, बच्चों और ट्रांसजेंडर्स की सुरक्षा सुनिश्चित करने से संबंधित दिशा निर्देश जारी करने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. याचिका में सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं की सुरक्षा और पोर्नोग्राफी पर प्रतिबंध लगाने के लिए दिशा निर्देश जारी करने की मांग की गई है. साथ ही इस तरह के अपराध रोकने के लिए केमिकल कैस्ट्रेशन (Chemical Castration) तक कि सजा का प्रावधान करने की मांग की है. पोर्नोग्राफी

जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने याचिकाकर्ता से कहा कि आप जिस तरह की सजा की मांग कर रही है. वह बर्बर हो सकती है. कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि वह विचार करेंगे और देखेंगे कि कानून में कहा खामी है.

याचिका में कई मांगें

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट से कहा कि संयोग से आज निर्भया सामुहिक बलात्कार की घटना की 12 वी वर्षगांठ भी है. याचिका में बलात्कार के दोषियों की रासायनिक नसबंदी, पोर्नोग्राफी पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है. इसके अलावे देश भर के सभी संस्थानों और कार्य स्थलों पर सीसीटीवी लगाने, अप्रतिबंधित अश्लील सामग्री पर प्रतिबंध लगाने, ऑनलाइन शिकायत प्रणाली के लिए जागरूकता बढ़ाने, शीघ्र सुनवाई, साफ और साफ शौचालयों की व्यवस्था, गार्डों की तैनाती और सुरक्षित सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराने की मांग की गई गई है.

कानून तो है पर उचित तरीके से लागू नहीं हैं

सुप्रीम कोर्ट वीमेन लॉयर्स एसोसिएशन की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा है. याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा कि सड़क से घर तक महिलाएं रेप का शिकार हो रही है. बड़े शहरों में हुए कुछ अपराध का पता तो चल जाता है लेकिन छोटी जगहों पर होने वाले अपराध को छुपा दिया जाता है. कानून व्यवस्था चलाने वालों और समाज के इस रवैये से महिलाओं को होने वाली पीड़ा बहुत बड़ी है. याचिकाकर्ता महालक्ष्मी पावनी ने कहा कि भारत में कड़े कानून तो है लेकिन वो उचित तरीके से लागू नहीं हो पा रहा है.


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-भारत एक्सप्रेस



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