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कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को बड़ी राहत, कोर्ट ने याचिका को खारिज किया

कर्नाटक की रैली में दिए बयान को लेकर दायर शिकायत पर तीस हजारी कोर्ट ने मल्लिकार्जुन खड़गे को बड़ी राहत दे दी है. कोर्ट ने साफ कहा कि खड़गे का बयान न तो समुदाय विशेष को निशाना बनाता है और न ही हिंसा भड़काता है. कोर्ट ने शिकायत को खारिज करते हुए कहा कि यह मामला राजनीतिक टिप्पणी से जुड़ा है, अपराध से नहीं.

District Courts Tis Hazari
Edited by Radha Priya

दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट से कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को बड़ी राहत मिल गई हैं. कोर्ट ने खड़गे के खिलाफ दायर आपराधिक शिकायत को खारिज कर दिया है. कोर्ट ने याचिकाकर्ता की उस मांग को भी खारिज कर दिया है, जिसमें संज्ञान लेने की मांग की गई थी.

यह शिकायत आरएसएस के सदस्य की ओर से दायर की गई थी. जिसमें आरोप लगाया गया था कि खड़गे ने अप्रैल 2023 में कर्नाटक के नरेगल में एक चुनावी रैली के दौरान कथित तौर पर नफरत फैलाने वाला भाषण दिया था, और पीएम मोदी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की थी.

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि खड़गे द्वारा दिया गया बयान कोर्ट की नजर में किसी समुदाय या धर्म को निशाना बनाकर नही दिया गया था, बल्कि यह राजनीतिक और सैद्धांतिक विचार का हिस्सा था. कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में हिंसा भड़काने का मामला नही बनता है.

शिकायतकर्ता को साक्ष्य प्रस्तुत करने की स्वतंत्रता

सुकर्नाटक जनसभा विवाद: खड़गे के बयान पर FIR की मांगनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि इस मामले में धारा 156 (3) सीआरपीसी के तहत जांच की कोई जरूरत नही है. कोर्ट ने कहा था कि शिकायतकर्ता को समन-पूर्व जारी साक्ष्य पेश करने की स्वतंत्रता है. कोर्ट ने शिकायतकर्ता से कहा था कि बाद में अगर उन्हें लगता है कि किसी विवादित तथ्यों से संबंधित जांच की जरूरत होती है तो धारा 202 सीआरपीसी के प्रावधान का सहारा लिया जा सकता है.

दिल्ली पुलिस ने इस मामले में अपना रिपोर्ट दाखिल करते हुए कहा था कि विवादित बयान देने की घटना कर्नाटक का है, इसलिए दिल्ली में इसको लेकर कोई मामला नहीं बनता है. क्योंकि यह क्षेत्राधिकार से बाहर है. वही शिकायतकर्ता के वकील ने कहा था कि यह भड़काऊ बयान देने का मामला है और यह सोशल मीडिया और कई माध्यमों से पूरे देश मे फैल गया है. इसलिए इसको लेकर कही भी प्राथमिकी दर्ज की जा सकती है.

ये भी पढ़ें- 2002 में बेटे और पति आग लगाकर महिला की हत्या के मामले में सुनवाई गई सजा को दिल्ली हाई कोर्ट ने बरकरार रखा।

कर्नाटक जनसभा विवाद: खड़गे के बयान पर FIR की मांग

बता दें कि वकील रविंद्र गुप्ता ने मल्लिकार्जुन खड़गे के खिलाफ आईपीसी की धारा 153 ए, 153 बी, 295 ए, 120बी और 34 के तहत एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी. 27 अप्रैल को कर्नाटक के एक जनसभा में प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ विवादित बयान दिया था. फिर दूसरे दिन के जनसभा में उन्होंने स्पष्टीकरण देते हुए खड़गे ने कहा था कि उन्होंने जहरीला वाला बयान भाजपा व आरएसएस को लेकर दिया था.

शिकायतकर्ता ने कहा था कि वह वर्षो से आरएसएस के जुड़ा रहा है और खड़गे के बयान से उन्हें काफी चोट पहुची है. इसको लेकर प्राथमिकी दर्ज करने की मांग करते हुए उसने.सब्जीमंडी थाने से शिकायत की लेकिन कई आवेदन के बाद भी पुलिस ने कोई कार्रवाई नही की है. इसलिए वे अदालत की शरण में आए है और प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने की मांग कर रहे हैं.

-भारत एक्सप्रेस



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