यूनियन कार्बाइड का कचरा जलाने को लेकर एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है. याचिका में मध्य प्रदेश में कचरे को जलाने के चल रहे काम पर रोक लगाने की मांग की गई है. जस्टिस संजय करोल और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि याचिका पर गर्मियों की छुट्टी के बाद सुनवाई करेगा.
जब तक कोर्ट खुलेगा तब तक 72 दिन पूरे हो चुके होंगे-वकील
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा कि जब तक कोर्ट खुलेगा तब तक 72 दिन पूरे हो चुके होंगे. जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा ने कहा कि आपने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में भी प्रयास किया था. लेकिन इसपर हाई कोर्ट ने विचार नही किया, उसके बाद आप सुप्रीम कोर्ट आए, यहां भी आपकी मांग पर विचार नही किया गया. फिर दोबारा आप सुप्रीम कोर्ट आए है. इससे पहले मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर याचिका का सुप्रीम कोर्ट ने निपटारा कर दिया था.
कोर्ट ने याचिकाकर्ता को हाई कोर्ट जाने को कहा
कोर्ट ने याचिकाकर्ता को हाई कोर्ट जाने को कहा था. इंदौर के रहने वाले चिन्मय मिश्रा ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. पीथमपुर में कचरे के निपटारे के आदेश के खिलाफ यह याचिका दायर की गई थी. याचिका में रासायनिक कचरे से पीथमपुर के आस पास के गांवों के लोगों के स्वास्थ्य के बारे में चिंता जताई थी.
कुल 12 सीलबंद कंटेनरों में पैक किए कचरे
दायर याचिका में कहा गया था कि यूनियन कार्बाइड के कचरे को भोपाल से पीथमपुर ले जाने का फैसला लेते समय पीथमपुर के लोगों से सलाह नही ली गई. कुल 12 सीलबंद कंटेनरों में पैक किए कचरे को 2 जनवरी को भोपाल से धार जिले के पीथमपुर ले जाया गया. मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने 3 दिसंबर 2024 को आदेश दिया था कि इस रासायनिक कचरे को वैज्ञानिक विधि से नष्ट किया जाए. मध्य प्रदेश सरकार ने एक जनवरी को यूनियन कार्बाइड से सुरक्षा के बीच कंटेनरों से कचरा पीथमपुर पहुंचाया. इसके बाद इसको लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है.
-भारत एक्सप्रेस
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