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उन्नाव रेप केस: कुलदीप सिंह सेंगर की सजा निलंबित होने पर CBI ने सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती

उन्नाव दुष्कर्म मामले में पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को मिली जमानत के खिलाफ CBI ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा उम्रकैद की सजा निलंबित किए जाने पर जांच एजेंसी ने गंभीर आपत्ति जताई है.

CBI challenges Sengar suspended sentence

उन्नाव रेप मामले में एक बार फिर कानूनी हलचल तेज हो गई है. सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इनवेस्टिगेशन (CBI) ने पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को मिली राहत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.

हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती

दरअसल, दिल्ली हाई कोर्ट ने हाल ही में सेंगर की उम्रकैद की सजा को अपील लंबित रहने तक निलंबित करते हुए उन्हें जमानत दे दी थी. इसी फैसले को चुनौती देते हुए CBI ने अब सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (LLP) दाखिल की है.

CBI ने ये याचिका संविधान के अनुच्छेद 136 के तहत दायर की है, जिसमें 23 दिसंबर को आए दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश को रद्द करने की मांग की गई है. जांच एजेंसी का साफ कहना है कि यह मामला बेहद गंभीर है और ऐसे अपराध में दोषी को जमानत देना कई तरह के जोखिम पैदा कर सकता है.

बता दें कि इससे पहले ये जदानकारी सामने आई थी कि पीड़िता का परिवार और CBI दोनों ही सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में है.

तुरंत रिहाई मिलना मुश्किल

दिल्ली हाई कोर्ट की जिस पीठ ने यह आदेश दिया, उसमें न्यायमूर्ति सुब्रमणियम प्रसाद और न्यायमूर्ति हरीश वैद्यनाथन शंकर शामिल थे. पीठ ने कड़ी शर्तो के साथ सेंगर को जमानत दी थी. हालांकि, इस आदेश के बावजूद सेंगर की तुरंत रिहाई की संभावना बहुत कम मानी जा रही है, क्योंकि वह पीड़िता के पिता की मौत से जुड़े दूसरे मामलों में अलग सजा काट रहे हैं.

2019 में मिली थी उम्र कैद की सजा

उन्नाव दुष्कर्म मामला देशभर में गुस्से और आक्रोश की वजह बना था. दिसंबर 2019 में ट्रायल कोर्ट ने सेंगर को नाबालिग लड़की के अपहरण और दुष्कर्म का दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी और 25 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे मामले को उत्तर प्रदेश से दिल्ली ट्रांसफर कर दिया था और रोजाना सुनवाई के निर्देश दिए थे.

हाई कोर्ट के बाहर प्रदर्शन

इस बीच, सेंगर को मिली जमानत के विरोध में शुक्रवार को दिल्ली हाई कोर्ट के बाहर पीड़िता के परिजनों और महिला अधिकार संगठनों ने प्रदर्शन किया. हाथों में तख्तियां लेकर और नारे लगाते हुए प्रदर्शनकारियों ने कहा कि इस तरह के फैसले से न्याय व्यवस्था पर लोगों का भरोसा डगमगाता है और महिलाओं के खिलाफ अपराधों को लेकर गलत संदेश जाता है.

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-भारत एक्सप्रेस



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