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मध्य प्रदेश का व्यापम घोटाला एक बार फिर सुर्खियों में है. मामले के व्हिसल ब्लोअर और पूर्व विधायक पारस सकलेचा की ओर से दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई और राज्य शासन को जांच और चार्जशीट की स्पष्ट जानकारी शपथ पत्र के जरिये दाखिल करने का आदेश दिया है.
हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ SC में याचिका
जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एन. वी. अंजारिया की कोर्ट 16 अप्रैल को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा. अदालत ने पूछा है कि इस मामले में पूर्व विधायक पारस सकलेचा की बारह साल पहले 2014 में दी गई 320 पेज की शिकायत और सबूत के दस्तावेजों पर अब तक जांच और क्या एक्शन हुआ है. सकलेचा ने इंदौर हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की है. इंदौर हाई कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा था कि वे सीधे तौर पर प्रभावित पक्ष नहीं है.
कोर्ट हुआ नाराज
दरअसल कोर्ट ने इस मामले में दायर अपील पर सीबीआई और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया था, लेकिन समय पर जबाव दाखिल नहीं करने पर कोर्ट ने नाराजगी व्यक्त करते हुए दोनों पक्षों से हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है.
मामले की सुनवाई के दौरान सकलेचा की ओर से पेश वरिष्ठ वकील विवेक तन्खा ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ शिकायतकर्ता की भूमिका अहम होती है. बता दें कि सबसे पहले पीएमटी परीक्षा 2013 में गड़बड़ी के साथ यह मामला सामने आया था. परीक्षा में मूल उम्मीदवारों की जगह मुन्नाभाइयों ने परीक्षा दी थी.
सुप्रीम कोर्ट ने CBI को सौंपा मामला
तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मामले की जांच एसटीएफ को सौप दिया था. बाद में व्हिसल ब्लोअर्स की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने जांच सीबीआई को सौप दिया था. इसमें तत्कालीन शिक्षा मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा, व्यापमं के बड़े अधिकारी, कॉलेज संचालक, दलाल, सॉल्वर और अभ्यर्थी आरोपित बनाए गए. इसमें कई गिरफ्तारियां भी हुई.
हालांकि इसके बाद भी कार्रवाई की रफ्तार धीमी गति से चलती रही. 2023 में दोबारा याचिका दाखिल की गई, जिसके बाद अब सुप्रीम कोर्ट ने मामले में जवाब तलब कर जांच की प्रगति पर स्पष्टता मांगी है.
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-भारत एक्सप्रेस
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