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वक्फ संशोधन कानून लागू: ममता बनर्जी का विरोध, लेकिन संविधान क्या कहता है?

Wakf Amendment Act: 8 अप्रैल से देशभर में वक्फ संशोधन कानून लागू हो गया है, लेकिन पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य में इसे लागू करने से इनकार किया है. जानिए क्या कहता है संविधान और राज्य सरकारों की भूमिका क्या है?

mamata Banerjee

पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी.

Wakf Amendment Act: वक्फ कानून लागू हो गया है. यह कानून पूरे देश में 8 अप्रैल से पूरे देश में प्रभावी रूप से लागू कर दिया गया है. वही पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने वक्फ संशोधन कानून को पश्चिम बंगाल में लागू नहीं किया जाएगा.ममता बनर्जी का कहना है कि वो अल्पसंख्यक लोगों की और उनकी संपत्ति की रक्षा करेंगी.

तो क्या वाकई में ऐसा होता है कि केंद्र के किसी कानून को राज्य की सरकारें लागू करने से मना कर दें? संसद से पास कानून और केंद्र सरकार के निदेशों को नकारने की यह घोषणा भले ही राज्य सरकारों के लिए राजनैतिक लाभ की हों, लेकिन संविधान इस बारे में साफ है कि राज्य सरकारें केंद्र के बनाये कानून या केंद्र के निर्देशों का मानने से इनकार नहीं कर सकती है.

सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता रंजन सिन्हा का कहना है कि केंद्रीय कानून को लागू करने के लिए राज्य सरकार बाध्य है, लेकिन उसके पास यह अधिकार है कि वह राज्य के हित को ध्यान में रखते हुए कानून में संशोधन कर सकती है. वही सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष आदिश अगरवल्ला कहते है कि केंद्र सरकार को कानून बनाने का अधिकार है और राज्य सरकारों का दायित्व है कि वह उन कानूनों का पालन करें.

संविधान क्या कहता है

वक्फ बोर्ड संशोधित कानून को लागू करना राज्यों की बाध्यता है अगर राज्य इसे लागू नहीं करते तो उनका ऐसा करना राज्य में संवैधानिक तंत्र का फेल होना माना जाएगा और संवैधानिक तंत्र फेल होने पर क्या कार्यवाही हो सकती है वह संविधान में स्पष्ट दी गई है. जबकि सुप्रीम कोर्ट के वकील आर. के कपूर का कहना है कि केंद्र के निर्देशों को मानना राज्यों का दायित्व है. केंद्र के किसी कानून को मानना संविधान का फेल होना माना जाता है और इसके फेल होने पर क्या कार्यवाही हो सकती है, वह संविधान में स्पष्ट रूप से दिया गया है.

बता दें कि संविधान के तहत विधायिका के पास कानून बनाने की शक्ति होती है और कार्यपालिका उन्हें लागू करने के लिए जिम्मेदार होती है. अक्सर विधायिका सामान्य सिद्धान्त और नीतियों के साथ किसी कानून को लागू करती है और कार्यपालिका को यह अधिकार सौंपती है कि वह कानून को लागू करने के कुछ विवरणों को निदिष्ट करें.

अनुच्छेद 256 कहता है कि राज्य सरकारों का दायित्व है कि वह संसद द्वारा पारित कानून को लागू करेगी. संसद से पास कानून और केंद्र सरकार के निर्देशों को नकारने की घोषणा भले ही राज्य सरकारें राजनीतिक लाभ के लिए करें, लेकिन राज्य की सरकारें केंद्र के बनाये कानून और उनके निर्देशो का पालन करने से रोक नही सकती है.

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-भारत एक्सप्रेस 



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