Tulsi Plant Care
Tulsi Plant Care: सनातन धर्म में तुलसी के पौधे को बेहद पवित्र और पूजनीय माना गया है. लगभग हर भारतीय घर के आंगन या बालकनी में तुलसी का पौधा जरूर होता है, जो न सिर्फ धार्मिक रूप से बल्कि सेहत के लिहाज से भी बहुत गुणकारी है. हालांकि, जून महीने की इस भीषण गर्मी, चिलचिलाती धूप और गर्म लू के थपेड़ों के कारण अक्सर तुलसी का पौधा सूखने या कुम्हलाने लगता है. कई बार सही जानकारी न होने की वजह से लोग पौधे में ज्यादा पानी डाल देते हैं, जिससे उसकी जड़ें सड़ जाती हैं. अगर आपके घर की तुलसी भी सूख रही है, तो कुछ आसान गार्डनिंग टिप्स अपनाकर आप उसे दोबारा नया जीवन दे सकते हैं.
तेज धूप से बचाएं और ग्रीन नेट का करें इस्तेमाल
तुलसी के पौधे को बढ़ने के लिए धूप की जरूरत तो होती है, लेकिन जून की दोपहर वाली सीधी और तीखी धूप इसकी कोमल पत्तियों को झुलसा देती है. इसलिए, अगर आपका पौधा सीधे छत या ऐसी बालकनी में रखा है जहां दिनभर तेज धूप आती है, तो उसे दोपहर के समय किसी छायादार जगह पर शिफ्ट कर दें. यदि पौधे को हटाना मुमकिन न हो, तो उसके ऊपर एक पतली ग्रीन नेट (हरे रंग का पर्दा) या कोई सूती कपड़ा लगा दें, ताकि उस पर छनकर धूप आए.
पानी देने का सही तरीका और समय बदलें
गर्मियों में लोग सबसे बड़ी गलती यह करते हैं कि वे दिन में किसी भी समय पौधे में पानी डाल देते हैं. तेज धूप के समय मिट्टी में पानी डालने से जड़ें उबल जाती हैं और पौधा सूख जाता है. तुलसी में पानी हमेशा सुबह सूरज निकलने से पहले या फिर शाम को सूरज ढलने के बाद ही दें. पानी देने से पहले उंगली से गमले की मिट्टी को छूकर देख लें, अगर मिट्टी में पहले से नमी है तो पानी न डालें. गमले के नीचे एक छोटा छेद जरूर रखें ताकि अतिरिक्त पानी बाहर निकल सके.
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मंजरी को हटाएं, घर पर बनाएं प्राकृतिक खाद
तुलसी के पौधे पर जब हरी या सूखी हुई मंजरी (बीज) आने लगती है, तो पौधे की ग्रोथ रुक जाती है क्योंकि उसकी पूरी ऊर्जा बीज बनाने में लगने लगती है. इसलिए समय-समय पर इन मंजरियों को हल्के हाथों से काटकर हटाते रहें. इसके अलावा पौधे को पोषण देने के लिए किसी केमिकल वाली खाद के बजाय घर की बनी सूखी चायपत्ती की खाद या पूरी तरह से सड़ी हुई गोबर की खाद का इस्तेमाल करें. महीने में एक बार मिट्टी की हल्की गुड़ाई जरूर करें, इससे जड़ों तक ऑक्सीजन पहुंचती है और तुलसी हमेशा हरी-भरी झाड़ीदार बनी रहती है.
भारत एक्सप्रेस
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