AI का छुपा हुआ सच
Cost Of Using AI: आजकल हर कोई अपनी छोटी-मोटी जरूरत के लिए चैटजीपीटी और जेमिनी जैसे एआई (AI) चैटबॉट्स से सवाल पूछता है. ऐसा लगता है, जैसे मानों हर सवाल का जवाब हमारी मुट्ठी में हो. हम सोचते हैं कि इससे समय और पैसा दोनों बच रहा है. हालांकि, यह अधूरा सच है. इस डिजिटल दुनिया के पीछे बहुत कुठ दांव पर लगा है. एक नई रिपोर्ट ने इस बात पर से पर्दा उठाया है. इसमें बताया गया है कि इससे भले ही आपकी जेब पर असर नहीं पड़ता लेकिन धरती इसकी कीमत चुका रही है. आइये जानें AI से पूछे गए एक सवाल की कीमत कितनी है और हर फोटो वीडियो की लिए कितनी लागत आती है.
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का सबसे ज्यादा इस्तेमाल करने के मामले में भारत अगली कतार में है. चाहे चैटजीपीटी हो या जेमिनी या फिर परपल्सिटी सभी प्लेटफॉर्म्स पर लोग अपने-अपने सवाल पूछते हैं और मशीन उसका झटपट जवाब देती है. हालांकि, इसके लिए आप लॉग टर्म कीमत चुका रहे हैं. इसे संबंध में AP की एक रिपोर्ट सामने आई है.
AI के उपयोग से पर्यावरण पर असर (AI environmental cost)
रिपोर्ट में बताया गया है कि एआई को डेटा सेंटर से ऑपरेट होते हैं. इसके लिए भारी मात्रा में बिजली और पानी का उपयोग होता है. डेटा सेंटर बहुत अधिक गर्मी पैदा करते हैं, जिसे पानी से ठंडा किया जाता है. रिपोर्ट के अनुसार, एक बड़े डेटा सेंटर में हर रोज 50 लाख गैलन तक पानी इस्तेमाल हो सकता है, जो एक छोटे शहर की रोजाना की जरूरत को पूरा करने के लिए पर्याप्त है. जाहिर है अगर इसके लिए कोई और उपाय नहीं किए गए तो एक न एक दिन पानी का समस्या आ सकती है.
कितनी आती है लागत? (AI Use Cost)
- एक बडे डेटा सेंटर को चलाने के लिए 50 लाख गैलन पानी रोजाना लगता है. (AI data centers Cost)
- एचडी क्वालिटी की एक फोटो में जितनी बिजली खर्च होती है उससे आधा फोन चार्ज हो सकता है. (AI Photo Cost)
- भारत की राजधानी क्या है? ऐसे सवाल के जवाब के लिए गुगल सर्च के मुकाबले 23 गुना ज्यादा ऊर्जा लगती है. (AI Question Cost)
- करीब 3 सेकंड का वीडियो बनवाने में खर्च हुई बिजली से एक बल्ब पूरे साल जल सकता है. (AI Video Cost)
कंपनियों के सामने चुनौती
कंपनियां अपने प्रोसेसरों और डेटा सेंटरों को ज्यादा एफिशिएंट बनाने पर काम कर रही हैं. हालांकि, इससे पर्यावरण को कोई लाभ नहीं बल्कि नुकसान ही होने वाला है. क्योंकि, कंपनियां डेटा सेंटर को लगातार चलाने के लिए किसी भी तरह की ग्रीन एनर्जी के उपयोग से बचती हैं. क्योंकि, इसकी लागत ज्यादा होती है. वहीं कुछ के कभी भी कट होने की आशंका बनी रहती है.
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क्या बदलाव की जरूरत है? (AI impact on climate)
एक्सपर्ट सुझाव देते हैं कि इमेजेज के मामले में एआई से बनी इमेज का कम से कम इस्तेमाल करके पर्यावरण को बचाने में योगदान दिया जा सकता है. इसके बजाय इंसानों की खींची हुई फोटो यूज करनी चाहिए. लोगों को एआई के जलवायु पर होने वाले असर के बारे में बताने के लिए एक ऐप तैयार किया गया है, जो बताता है कि एआई से पूछे गए एक सवाल में कितनी ऊर्जा खर्च होती है और इसका पर्यावरण पर क्या असर पड़ता है. लोगों को एआई के पर्यावरण पर पड़ने वाले असर के बारे में जागरूक करने की जरूरत है, ताकि वे इसका जिम्मेदारी से इस्तेमाल कर सकें.
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