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द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी व्रत आज, इस तरह पूजा करने से दूर होंगे सारे कष्ट, जानें मुहूर्त व पूजा-विधि

Dwijapriya Sankashti Chaturthi 2024 Vrat Puja Vidhi: द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश के 32 स्वरूपों में से छठे स्वरूप की पूजा होती है. संकष्टी चतुर्थी का व्रत आज रखा जा रहा है.

Sankashti Chaturthi 2024

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी 2024

Dwijapriya Sankashti Chaturthi 2024: हर महीने गणेश चतुर्थी दो बार पड़ती है. कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टि चतुर्थी कहते हैं, जबकि शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहा जाता है. पंचांग के अनुसार, 28 फरवरी 2024 को यानी आज द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जा है. मान्यतानुसार, इस दिन भगवान गणेश के 32 स्वरूपों में से छठे स्वरूप की पूजा होती है. कहा जाता है कि इस दिन भगवान गणेश की पूजा करने से भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है. साथ ही गणेश की कृपा से जीवन की विघ्न-बाधाएं दूर हो जाती हैं. द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी कब है, शुभ मुहूर्त क्या है और पूजा की विधि क्या है? जानिए.

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी 2024

दृक पंचांग के अनुसार, द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी का व्रत 28 फरवरी, बुधवार को यानी आज है. चतुर्थी तिथि की शुरुआत 27 फरवरी की देर रात 1 बजकर 53 मिनट से हो चुकी है. जबकि चतुर्थी तिथी की समाप्ति 29 फरवरी को सुबह 4 बजकर 18 मिनट पर होगी. संकष्टी चतुर्थी के दिन चंद्रोदय का समय रात 9 बजकर 27 मिनट है.

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी के दिन सुबह उठकर नहाएं और उसके बाद साफ कपड़े पहनें. इसके बाद पूजा स्थान या मंदिर को साफ-सुथरा करें. इतना करने के बाद पूरब या उत्तर दिशा की ओर मुंह करके भगवान गणेश को जल अर्पित करें. ऐसा करते समय जल में तिल जरूर डालें. संकष्टी चतुर्थी के दिन व्रत रखें. इसके बाद शाम के समय विधिवत गणपति देव की पूजा करें. पूजन के बाद उनकी आरती करें. भोग में भगवान गणेश को मोदक या बूंदे के लड्डू अर्पित करें. रात में जब चंद्रोदय हो जाए तो उन्हें अर्घ्य देकर व्रत का पारण करें. लड्डू या तिल का सेवन करके व्रत खोला जा सकता है.

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी व्रत का महत्व

पौराणिक मान्यता के अनुसार, फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी कहलाती है. माना जाता है कि इस दिन भगवान गणपित की विधि-विधान से पूजा करने पर जीवन के हर कष्ट दूर हो जाते हैं. दक्षिण भारत के कई राज्यों में द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी का व्रत विशेष तौर पर रखा जाता है. द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी के दिन गणपति की पूजा करने से नकारात्मक ऊर्जा नष्ट हो जाती है. साथ ही मानसिक शांति बनी रहती है. इतना ही नहीं, इस दिन गणपति की उपासना करने से घर में आ रही विघ्न-बाधाएं भी नष्ट हो जाती हैं.

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-भारत एक्सप्रेस



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