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Ram Navami 2025: 5 या 6 अप्रैल…इस बार कब मनाएं रामनवमी? जानिए राम जन्मोत्सव की सही तिथि और शुभ मुहूर्त

Ram Navami 2025: त्रेता युग में भगवान राम का अवतार चैत्र नवरात्रि के नौवें दिन हुआ था, लेकिन इस वर्ष 30 मार्च से आरंभ हुई नवरात्रि केवल आठ दिनों की है. ऐसे में भगवान राम का जन्मोत्सव, यानी राम नवमी, कब मनाई जाएगी? यहां जानिए.

Ram Navami 2025

Ram Navami 2025: रामनवमी हिंदू धर्म का एक पवित्र पर्व है, जो भगवान श्रीराम के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है. यह पर्व हर साल चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाया जाता है, जो आमतौर पर मार्च या अप्रैल के महीने में आती है. इस दिन श्रद्धालु उपवास रखते हैं, रामायण का पाठ करते हैं और भजन-कीर्तन में भाग लेते हैं. मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना होती है और भगवान श्रीराम की आराधना की जाती है.

इस साल रामनवमी 6 अप्रैल 2025 में मनाई जाएगी और इस दिन सुकर्मा योग, रवि योग, रवि पुष्य योग, सर्वार्थ सिद्धि और पुष्य नक्षत्र का संयोग है. रविवार होने के कारण और रविपुष्य नक्षत्र के कारण इस बार रविपुष्य योग बन रहा है. इस लिए दान और पूजा का बहुत फल मिलेगा.

रामनवमी 2025 कब मनाई जाएगी?

हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 5 अप्रैल 2025 को शाम 7:26 बजे शुरू होगी और 6 अप्रैल को शाम 7:22 बजे समाप्त होगी. चूंकि हिंदू धर्म में उदयातिथि को महत्व दिया जाता है, इसलिए इस बार रामनवमी का पर्व 6 अप्रैल 2025 को मनाया जाएगा.

हवन करने का सही समय

राम नवमी का विशेष महत्व है क्योंकि इसी दिन भगवान श्रीराम का जन्म हुआ था. इस वर्ष राम नवमी पर पूजा का शुभ समय दो घंटे 24 मिनट का रहेगा. भक्त 6 अप्रैल 2025 को सुबह 11:09 बजे से दोपहर 1:40 बजे तक पूजा और हवन कर सकते हैं. मान्यता है कि भगवान राम का जन्म मध्याह्न मुहूर्त में हुआ था, जो इस दिन दोपहर 12:24 बजे रहेगा. इसी समय पूजा, हवन और जप करना विशेष फलदायी माना जाता है.

राम नवमी 2025 तिथि व शुभ मुहूर्त

  • राम नवमी तिथि: रविवार, 6 अप्रैल 2025
  • मध्याह्न मुहूर्त: सुबह 11:09 बजे से दोपहर 1:40 बजे तक
  • मध्याह्न पल: दोपहर 12:24 बजे
  • नवमी तिथि प्रारंभ: 5 अप्रैल 2025, शाम 7:26 बजे
  • नवमी तिथि समाप्त:6 अप्रैल 2025, शाम 7:22 बजे

रामनवमी का महत्व

रामनवमी का दिन भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव का प्रतीक है. श्रीराम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है क्योंकि उन्होंने सदैव धर्म, सत्य और न्याय का पालन किया. यह पर्व हमें उनके जीवन मूल्यों को अपनाने और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है. भगवान राम, विष्णु के सातवें अवतार माने जाते हैं, जिन्होंने धरती पर अधर्म का नाश कर धर्म की स्थापना के लिए अवतार लिया.

इस पावन अवसर पर भक्तजन रामचरितमानस और रामायण का पाठ करते हैं, राम कथा सुनते हैं और भक्ति संगीत में रम जाते हैं. कई स्थानों पर शोभायात्राएं निकाली जाती हैं, जिनमें भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान की सुंदर झांकियां प्रस्तुत की जाती हैं.

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-भारत एक्सप्रेस 



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