सफला एकादशी 2025
Ekadashi Vrat 2025: हिंदू पंचांग के अनुसार पौष माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को सफला एकादशी कहा जाता है. यह एकादशी सफलता, सुख-समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए अत्यंत फलदायी मानी जाती है. इस दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा और व्रत करने से पापों का नाश होता है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है.
15 या 16 दिसंबर कब रखा जाएगा सफला एकादशी का व्रत? (Safala Ekadashi parana time)
पौष कृष्ण एकादशी तिथि की शुरुआत 14 दिसंबर 2025 (रविवार) शाम 6:50 बजे से होगी और समापन 15 दिसंबर 2025 (सोमवार) रात 9:21 बजे होगा. उदय तिथि के अनुसार सफला एकादशी का व्रत 15 दिसंबर 2025 (सोमवार) को ही रखा जाएगा. व्रत का पारण 16 दिसंबर 2025 को द्वादशी तिथि में किया जाएगा.
सफला एकादशी 2025: पूजा के शुभ मुहूर्त (Safala Ekadashi vrat December 2025)
इस दिन पूजा और व्रत संकल्प के लिए कई शुभ योग बन रहे हैं. इन मुहूर्तों में पूजा करने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति मानी जाती है
- ब्रह्म मुहूर्त: 05:17 से 06:12
- प्रातः संध्या: 05:44 से 07:06
- अभिजित मुहूर्त: 11:56 से 12:37
- विजय मुहूर्त: 02:00 से 02:41
- गोधूलि मुहूर्त: 05:24 से 05:51
- सायाह्न संध्या: 05:26 से 06:48
सफला एकादशी का महत्व
शास्त्रों में सफला एकादशी को अत्यंत पुण्यदायी बताया गया है. मान्यता है कि इस व्रत से जीवन के हर क्षेत्र में सफलता मिलती है. कहा जाता है कि इस दिन व्रत रखने से **5000 वर्षों की तपस्या के समान फल प्राप्त होता है. भगवान विष्णु की कृपा से संतान सुख, ऐश्वर्य और मोक्ष का द्वार खुलता है.
सफला एकादशी की सरल पूजा विधि
सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें. पूजा स्थल पर चौकी बिछाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें. गंगाजल छिड़कें, दीपक जलाएं, तुलसी दल, फूल और माला अर्पित करें. विष्णु सहस्रनाम, कनक स्तोत्र और सफला एकादशी व्रत कथा का पाठ करें. भोग में दूध से बनी मिठाई अर्पित करें. शाम को आरती और तुलसी पूजन करें तथा जरूरतमंदों को दान दें.
सफला एकादशी में न करें 5 गलतियां (saphala ekadashi fasting rules)
- तामसिक भोजन का सेवन- एकादशी पर प्याज, लहसुन, मांस, मदिरा और अंडा पूरी तरह वर्जित है. घर में भी केवल सात्विक भोजन ही बनाएं, वरना व्रत का फल कम हो जाता है.
- जरूरत से ज्यादा फलाहार- फलाहार का अर्थ यह नहीं कि दिन भर खाते रहें. बार-बार या पेट भरकर खाना व्रत की शक्ति को कमजोर करता है. संयम ही व्रत का मूल है.
- गलत बोलना और निंदा करना- एकादशी के दिन वाणी पर संयम रखें. चुगली, झूठ, क्रोध और निंदा से व्रत का पुण्य नष्ट हो जाता है. भजन, कीर्तन और मंत्र जाप में समय बिताएं.
- दिन में सोना- व्रत के दिन दिन में सोना निषेध माना गया है. इससे आलस्य बढ़ता है और व्रत खंडित होता है. पूजा-पाठ और भक्ति में मन लगाएं.
- ब्रह्मचर्य का पालन न करना- एकादशी पर मन, वचन और कर्म से ब्रह्मचर्य आवश्यक है. इसका पालन करने से व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है.
व्रत का महत्व (Safala Ekadashi significance)
सफला एकादशी 2025 में 15 दिसंबर को मनाई जाएगी. यदि आप व्रत, पूजा और पारण के नियमों का सही ढंग से पालन करते हैं और इन 5 गलतियों से बचते हैं, तो यह एकादशी आपके जीवन में सफलता और समृद्धि लेकर आएगी.
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