Trayodashi Shradh 2025: श्राद्ध पक्ष की प्रत्येक तिथि का अपना अलग महत्व है। इन्हीं में से एक है त्रयोदशी तिथि का श्राद्ध. यह दिन विशेष रूप से उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जिनका निधन त्रयोदशी को हुआ हो. साथ ही, उन बच्चों और संन्यासियों का भी श्राद्ध इस तिथि पर किया जाता है, जिनकी मृत्यु असमय हुई हो या जिनकी पुण्यतिथि ज्ञात न हो. मान्यता है कि इस दिन किया गया श्राद्ध पितरों की आत्मा को शांति देता है और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है.
पितृ दोष निवारण में सहायक
ज्योतिष शास्त्र में त्रयोदशी श्राद्ध का खास महत्व बताया गया है. मान्यता है कि इस दिन श्राद्ध करने से पितृ दोष का प्रभाव कम होता है. जिन लोगों की कुंडली में पितृ दोष होता है, उनके लिए यह दिन विशेष लाभकारी माना गया है.
श्राद्ध और तर्पण की विधि
शुभ मुहूर्त: त्रयोदशी श्राद्ध कुतुप, रोहिणी या मध्य काल में करना सर्वोत्तम माना गया है.
तैयारी: सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें. फिर पितरों के लिए भोजन बनाएं जिसमें पूरी, खीर, सब्जी और अन्य पकवान शामिल हों.
पिंडदान: चावल, जौ और काले तिल से बने पिंड अर्पित करें. इसके बाद पितरों के लिए जल से तर्पण करें.
ब्राह्मण भोजन: श्राद्ध पूर्ण होने के बाद ब्राह्मण को भोजन कराएं और दक्षिणा दें.
जीव-जंतु को भोजन: भोजन का एक भाग कौवों, कुत्तों और गायों को भी अर्पित करना चाहिए. इसे पितरों की तृप्ति से जोड़ा जाता है.
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त्रयोदशी श्राद्ध के पूजन मंत्र
ॐ पितृगणाय विद्महे जगत धारिणी धीमहि तन्नो पितृो प्रचोदयात्।
ॐ देवताभ्य: पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च। नम: स्वाहायै स्वधायै नित्यमेव नमो नम:।
ॐ आद्य-भूताय विद्महे सर्व-सेव्याय धीमहि। शिव-शक्ति-स्वरूपेण पितृ-देव प्रचोदयात्।
गोत्रे अस्मतपिता (पितरों का नाम) शर्मा वसुरूपत् तृप्यतमिदं तिलोदकम गंगा जलं वा तस्मै स्वधा नमः।
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-भारत एक्सप्रेस
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