Bharat Express DD Free Dish

ग्रासरूट से निकल ग्लोबल पोडियम पर काटा गदर, जानें सरकार ने क्यों बरसाए ‘खेलो इंडिया’ पर 36,441 करोड़?

केंद्र सरकार ने ‘खेलो इंडिया’ योजना के विस्तार के लिए 36,441 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है, जिसका लक्ष्य 2036 ओलंपिक तक भारत को खेल महाशक्ति बनाना है. CWG 2026 में भारत के 39 में से 27 पदक खेलो इंडिया और SAI से जुड़े खिलाड़ियों ने जीतकर इस मॉडल की सफलता साबित कर दी है.

ai generated image

Khelo India Budget 36441 Crore: भारतीय खेल जगत में इन दिनों एक ऐसा शांत लेकिन भयंकर बदलाव देखने को मिल रहा है, जिसने देश की पूरी खेल संस्कृति को बदलकर रख दिया है. आपको पता होगा कि एक वक्त था जब हमारे खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सिर्फ भागीदारी के लिए जाते थे, लेकिन आज भारत के युवा सीधे पोडियम पर कब्जा जमाकर राष्ट्रगान की गूंज सुना रहे हैं. इसी रफ्तार को अगले स्तर पर ले जाने के लिए केंद्र सरकार ने ‘खेलो इंडिया’ योजना के विस्तार को 36,441 करोड़ का रिकॉर्ड बजट मंजूर कर दिया है.

इस बीच सवाल यह उठ रहा है कि आखिर सरकार ने देश के खेल बजट में इतनी बड़ी बाजी क्यों खेली? इसका सीधा और सटीक जवाब ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के नतीजों में छिपा है, जहां भारत के कुल 39 मेडलों में से 25 से अधिक मेडल सीधे तौर पर ‘खेलो इंडिया’ की नर्सरी और साई सेंटर्स से निकले युवाओं ने जीते हैं.

खेलो इंडिया पर 36,441 करोड़ का दांव क्यों?(Khelo India Budget 36441 Crore)

हाल ही में सरकार ने देश में स्पोर्ट्स के इकोसिस्टम को बदलने के लिए 36,441 करोड़ की ‘खेलो इंडिया’ योजना को मंजूरी दी है. यह केवल एक बजट आवंटन नहीं बल्कि 2036 के अहमदाबाद ओलंपिक तक भारत को दुनिया की शीर्ष 10 खेल महाशक्तियों में खड़ा करने का एक बड़ा मिशन है.

दरअसल इस योजना के पीछे सरकार का स्पष्ट विजन है कि गांव और छोटे शहरों की प्रतिभाओं को अगर वर्ल्ड-क्लास कोचिंग, मॉडर्न इंफ्रास्ट्रक्चर और सही समय पर वित्तीय मदद मिले, तो वे देश का नाम दुनिया भर में रौशन कर सकते हैं. इसीलिए 36,441 करोड़ का यह मेगा बजट इसी विजन को जमीन पर उतारने का सबसे बड़ा जरिया बना है.

63,000 से अधिक एथलीटों को निखारा

आपको बता दें कि साल 2018 में अपनी शुरुआत से लेकर अब तक 63,000 से अधिक एथलीटों को खेलो इंडिया गेम्स के माध्यम से तराशा और निखारा जा चुका है. यह योजना अब महज एक टूर्नामेंट नहीं बल्कि एक पूरी इंडस्ट्री बन चुकी है, जहां टैलेंट हंट के जरिए उन युवाओं को खोजा जाता है जिनके पास हुनर तो था लेकिन मौका नहीं.

वहीं, एलीट एथलीट स्कॉलरशिप के जरिए इन खिलाड़ियों को हर साल 5 लाख रुपये की मदद और साई (SAI) के नेशनल सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस में साइंटिफिक ट्रेनिंग दी जा रही है. आज नतीजा यह है कि हर बड़ी नेशनल और इंटरनेशनल प्रतियोगिता में खेलो इंडिया के तैयार किए हुए खिलाड़ी ही भारत का चेहरा बने हुए हैं.

यह भी पढ़ें: आखिरी सांसें गिन रहे CWG पर भारत का दांव: क्या 2030 में अहमदाबाद से खुलेगा ओलंपिक होस्ट करने का रास्ता?

ग्लासगो में भी दिखा जलवा

ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स के नतीजों ने खेलो इंडिया के मॉडल (Khelo India Budget 36441 Crore) पर पक्की मुहर लगा दी है. भारत ने जो 39 मेडल जीते हैं, उनमें से 27 मेडल विजेता खिलाड़ी सीधे तौर पर खेलो इंडिया योजना से जुड़े हुए हैं. रिंग से लेकर ट्रैक तक, इन युवाओं ने दुनिया के नामचीन एथलीटों को धूल चटा दी. ग्लासगो की जीत ने साबित कर दिया है कि खेलो इंडिया की यह नर्सरी अब पूरी तरह से तैयार है और आने वाले ओलंपिक में यही सितारे भारत के लिए गोल्ड की बारिश करने वाले हैं.

ग्लासगो में झंडे गाड़ने वाले ‘खेलो इंडिया’ के सितारे

खिलाड़ी का नाम खेल पदक
प्रीति पवार मुक्केबाजी 🥇 गोल्ड
जास्मिन लेम्बोरिया मुक्केबाजी 🥇 गोल्ड
साक्षी चौधरी मुक्केबाजी 🥇 गोल्ड
प्रिया घंघास मुक्केबाजी 🥇 गोल्ड
अरुंधति चौधरी मुक्केबाजी 🥇 गोल्ड
सचिन सिवाच मुक्केबाजी 🥇 गोल्ड
अंकुश पांघल मुक्केबाजी 🥇 गोल्ड
जदुमनी सिंह मुक्केबाजी 🥈 सिल्वर
अस्मिता डे जूडो 🥇 गोल्ड
हर्ष सिंह जूडो 🥇 गोल्ड
यामिनी मौर्या जूडो 🥈 सिल्वर
उन्नति शर्मा जूडो 🥉 ब्रॉन्ज
ज्ञानेश्वरी यादव वेटलिफ्टिंग 🥈 सिल्वर
ऋषिकांत सिंह वेटलिफ्टिंग 🥈 सिल्वर
वल्लूरी अजय बाबू वेटलिफ्टिंग 🥈 सिल्वर
मुथुपंडी राजा वेटलिफ्टिंग 🥈 सिल्वर
लवप्रीत सिंह वेटलिफ्टिंग 🥈 सिल्वर
गुलवीर सिंह एथलेटिक्स 🥈 सिल्वर / 🥉 ब्रॉन्ज
दिलीप गावित पैरा-एथलेटिक्स 🥇 गोल्ड
सोमन राणा पैरा-एथलेटिक्स 🥇 गोल्ड
शर्मिला धनखड़ पैरा-एथलेटिक्स 🥇 गोल्ड
मोहम्मद बासिल पैरा-एथलेटिक्स 🥈 सिल्वर
शुभम जुयाल पैरा-एथलेटिक्स 🥈 सिल्वर
शिल्पा के. शायला पैरा-एथलेटिक्स 🥉 ब्रॉन्ज
सर्वेश कुशारे एथलेटिक्स 🥈 सिल्वर
यश वीर सिंह एथलेटिक्स 🥉 ब्रॉन्ज
सेलवा प्रभु एथलेटिक्स 🥉 ब्रॉन्ज

-भारत एक्सप्रेस

 



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read