भारतीय ग्रैंडमास्टर आर. प्रग्गनानंदा ने शुक्रवार को नॉर्वे चेस चैंपियनशिप जीतकर नया इतिहास बनाया. वह इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट को जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बने. उनकी इस उपलब्धि पर अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी ने सोशल मीडिया पर उन्हें बधाई दी और कहा कि प्रग्गनानंदा युवा भारत के आत्मविश्वास का प्रतीक हैं.
अदाणी का संदेश
गौतम अदाणी ने लिखा कि नॉर्वे चेस जीतना शतरंज की दुनिया में धैर्य और बुद्धि की सबसे बड़ी परीक्षा है. उन्होंने कहा कि प्रग्गनानंदा का खेल निडर और लक्ष्य पर केंद्रित रहता है, जो उन्हें खास बनाता है.
Congratulations to Praggnanandhaa on becoming the first Indian to win the Norway Chess tournament – one of the ultimate tests of endurance, intellect and temperament in the world of chess.
To defeat the world’s absolute best on one of chess’s grandest stages is a remarkable… pic.twitter.com/Cm8hncebV5
— Gautam Adani (@gautam_adani) June 6, 2026
निर्णायक मुकाबला
क्लासिकल चेस इवेंट के 10वें और आखिरी राउंड में प्रग्गनानंदा ने जर्मनी के विंसेंट कीमर को हराया. सफेद मोहरों से खेलते हुए उन्होंने 45वीं चाल में जीत दर्ज की. इस जीत के साथ उन्होंने टूर्नामेंट में पांच जीत, दो हार और दो ड्रॉ हासिल किए और कुल 18 अंक जुटाए.
शानदार वापसी
छठे दौर तक अंक तालिका में सबसे नीचे रहने वाले प्रग्गनानंदा ने लगातार चार क्लासिकल मुकाबले जीतकर धमाकेदार वापसी की. इस दौरान उन्होंने विश्व नंबर एक मैग्नस कार्लसन को टूर्नामेंट में दूसरी बार हराया और डी. गुकेश के खिलाफ भी जीत दर्ज की.
खास उपलब्धि
प्रग्गनानंदा 2021 के बाद नॉर्वे चेस में लगातार चार क्लासिकल मुकाबले जीतने वाले केवल दूसरे खिलाड़ी बने हैं. इससे पहले यह रिकॉर्ड मैग्नस कार्लसन के नाम था.
कहां के रहने वाले हैं प्रग्गनानंदा?
भारतीय ग्रैंडमास्टर आर. प्रग्गनानंदा का जन्म 10 अगस्त 2005 को चेन्नई, तमिलनाडु में हुआ. उनके पिता रमेश बाबू बैंक मैनेजर हैं और माता नागलक्ष्मी गृहिणी हैं. उनकी बहन आर. वैषाली भी ग्रैंडमास्टर हैं, जिससे यह भाई-बहन की जोड़ी शतरंज जगत में खास पहचान रखती है.
शतरंज की शुरुआत
प्रग्गनानंदा ने बचपन से ही शतरंज में अपनी प्रतिभा दिखाई. उन्होंने 2013 में अंडर-8 और 2015 में अंडर-10 विश्व युवा शतरंज चैंपियनशिप जीती. उनकी शुरुआती उपलब्धियों ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई.
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महत्वपूर्ण उपलब्धियां
2016 में वह सबसे कम उम्र में इंटरनेशनल मास्टर बने और 2018 में मात्र 12 साल की उम्र में ग्रैंडमास्टर का खिताब हासिल किया. यह उपलब्धि उन्हें दुनिया के सबसे युवा ग्रैंडमास्टर्स में शामिल करती है.
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-भारत एक्सप्रेस
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