Bharat Express DD Free Dish

digital payments

FY25 में डिजिटल भुगतान में 34.8% की उछाल, UPI की हिस्सेदारी लगभग 84% हुई. लेनदेन मूल्य ₹2,862 लाख करोड़, रिटेल लेनदेन 2,222.9 करोड़. RBI की AI और e-Kuber 3.0 योजनाएं वित्तीय समावेशन को बढ़ाएंगी.

RBI के मुताबिक, यूपीआई क्यूआर कोड में वृद्धि के कारण क्रेडिट कार्ड लेनदेन की वृद्धि दर कम होकर 7.94 प्रतिशत रह गई है. डेबिट कार्ड की संख्या सालाना आधार पर 2.7 प्रतिशत बढ़कर 99 करोड़ पर पहुंच गई है.

भारत में निजी खपत 2024 में 2.1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गई, जो 7.2% वार्षिक वृद्धि के साथ वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं से तेज़ी से बढ़ रही है.

भारत में UPI ने 84% डिजिटल लेन-देन पर नियंत्रण किया है, और UPI की वृद्धि 2021 से 2024 तक 4.4 गुना बढ़ी है, जो इसे डिजिटल भुगतान का प्रमुख साधन बनाती है.

यूपीआई पी2एम लेनदेन की वॉल्यूम, यूपीआई पी2पी लेनदेन की वॉल्यूम से अधिक हो गई है. हालांकि, वैल्यू में यूपीआई पी2पी लेनदेन अभी भी यूपीआई पी2एम लेनदेन से अधिक है.

भारत में डिजिटल परिवर्तन से आर्थिक वृद्धि और समावेशन को बढ़ावा मिल रहा है. Visa, AI और वित्तीय साक्षरता के माध्यम से भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को सुरक्षित और सशक्त बना रहा है.

डिजिटल भुगतान की दिग्गज कंपनी वीज़ा की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत के छोटे शहर डिजिटल भुगतान और ऋण अपनाने के लिए प्रमुख केंद्र बन रहे हैं.

ONDC के नॉन-एक्जीक्यूटिव चेयरपर्सन राम सेवक शर्मा ने कहा कि अपना देश दुनिया में डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर (DPI) के माध्यम से डिजिटल वर्ल्‍ड में पहुँच को लोकतांत्रिक बनाने की दिशा में अग्रसर है.

डिजिटल पेमेंट्स, ब्लॉकचेन और ओपन बैंकिंग सिस्टम्स के बढ़ते उपयोग से भारतीय फिनटेक उद्योग में 7.5% की रोजगार वृद्धि का अनुमान है. बैंकिंग और NBFC सेक्टर में नई तकनीकों और नियामक मानकों के चलते नौकरियों की मांग बढ़ रही है.

नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के आंकड़ों के मुताबिक, सिर्फ 31 अक्टूबर, यानी दीवाली के दिन, यूपीआई पर 64.4 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए. यह एक दिन में सबसे ज्यादा ट्रांजैक्शन का रिकॉर्ड है.