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economy

कोरोना महामारी के बाद भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 7,100 करोड़ अमेरिकी डॉलर से कम हुआ था, परंतु वर्ष 2022 के बाद से यह अब लगातार उतनी ही तेज गति से आगे भी बढ़ रहा है। और, अब तो यह उम्मीद की जा रही है कि आगे आने वाले समय में यह एक लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर के स्तर को भी पार कर जाएगा।

भारत को वर्ष 2047 तक विकसित देशों की श्रेणी में शामिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। वर्ष 2027 तक भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा, ऐसी संभावना भी व्यक्त की जा रही है।

लोकसभा चुनाव-2024 के दरम्‍यान अभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न्यूज़वीक को दिए इंटरव्‍यू में अपनी दूरगामी सोच और डेवलपमेंट के एजेंडे को लेकर विचार साझा किए। लोकतंत्र की महानता तथा प्रेस की स्वतंत्रता पर बोले- भारत लोकतंत्र की जननी..

डॉ. हेडगेवार ने कभी पेशेवर डॉक्टर के रूप में कार्य नहीं किया। वे देश की स्वतंत्रता और सेवा हित में चलाये जाने वाले कार्यक्रमों से जुड़कर अध्ययन करते थे। उनके द्वारा स्थापित किया गया संघ आज विश्व के सबसे बड़े सांस्कृतिक संगठन के रूप में सामने खड़ा है।

Video: 13 March 2024 का दिन भारतीय निवेशकों के लिए काला दिन साबित हुआ है. एक ही दिन में निवेशकों के करीब 14 लाख करोड़ रुपये स्वाहा हो गए. इसका कारण था SEBI प्रमुख माधबी पुरी बुच का वह बयान, जिसने भारतीय शेयर बाजार में खलबली मचा दी.

राहुल गांधी ने ग्वालियर के देवास गार्डन में अग्निवीरों और पूर्व सैनिकों से संवाद किया. उन्‍होंने मोहना में रोड शो किया. भाजपा सरकार पर हमला बोला तो भाजपा नेता तरुण चुघ ने कांग्रेस सरकार की याद दिलाई.

भाजपा नेता कह रहे हैं कि देश की स्वतंत्रता के 100वें वर्ष को चिह्नित करते हुए 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाना है। इस दृष्टिकोण में आर्थिक विकास, सामाजिक प्रगति, पर्यावरणीय स्थिरता और सुशासन शामिल है।

हम सभी के लिए हर्ष का विषय है कि देश में विनिर्माण इकाईयों की वृद्धि दर 4.8% से बढ़कर वित्तीय वर्ष 2023-24 की तृतीय तिमाही में 11.6% हो गई है तथा निर्माण के क्षेत्र में वृद्धि दर 9.5% की रही है। साथ ही, खनन के क्षेत्र में वृद्धि दर 1.4% से बढ़कर 7.5% की रही है। ये तीनों रोजगार सृजन के क्षेत्र हैं।

पीएम मोदी की 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी में सहकारिता का बड़ा हिस्सा सुनिश्चित कर देश सहकारिता की 21वीं सदी में प्रवेश करेगा. यह कहना है गृहमंत्री अमित शाह का, जानें वह और क्या बोले—

जैसे-जैसे भारत अपनी नियति के चौराहे पर खड़ा है, नेतृत्व का चुनाव महत्वपूर्ण हो जाता है। भारतीय राजनीति के अस्थिर और ध्रुवीकरण परिदृश्य में, एक नेता अटूट संकल्प, दूरदर्शी सोच और समावेशी विकास के प्रति प्रतिबद्धता के प्रतीक के रूप में उभरे हैं- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी