कवि, नाटककार, पत्रकार और संपादक…ऐसा रहा सर्वेश्वर दयाल सक्सेना का अनूठा सफर
सर्वेश्वर दयाल सक्सेना हिंदी साहित्य के बहुआयामी लेखक थे, जिनकी रचनाएँ कविता, नाटक, व्यंग्य और बाल साहित्य में श्रेष्ठता की मिसाल हैं. उनका योगदान नई कविता आंदोलन और बाल साहित्य में आज भी याद किया जाता है.
Namvar Singh की जयंती : वाद-विवाद, संवाद और बनारसिया ठाठ ने नामवर सिंह को बना दिया अमर
Namvar Singh: 1971 में 'कविता के नए प्रतिमान' के लिए उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला. उनकी आलोचना में बनारस की मिट्टी की सोंधी खुशबू थी, जो उनकी बेबाक और देशज शैली में झलकती थी.
कौन थे हिंदी गद्य को नई दिशा देने वाले साहित्यकार? इंग्लैंड में भी गूंजी लेखनी, जानें पूरी कहानी
हिंदी साहित्य में एक ऐसा नाम, जिन्होंने भारतेंदु युग से पहले ही हिंदी गद्य को मजबूती दी और उसे एक नई पहचान दिलाई.
Sunita Jain Books: शब्दों से संवेदना गढ़ने वाली कवयित्री, हिंदी-अंग्रेजी साहित्य की सेतु निर्माता
13 जुलाई 1941 को अंबाला में जन्मी सुनीता जैन ने हिंदी और अंग्रेजी साहित्य दोनों में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज की. 70 से अधिक पुस्तकों की रचनाकार, पद्मश्री सम्मानित और स्त्री अस्मिता की आवाज रहीं सुनीता जैन का लेखन आज भी प्रेरित करता है.
कौन थे हुल्लड़ मुरादाबादी? वो शख्स जिनकी रचनाएं सुनकर लोटपोट हो जाते थे लोग, समाज को भी दिखाया आईना
हुल्लड़ मुरादाबादी, जिनका असली नाम सुशील कुमार चड्ढा था, ने हिंदी साहित्य में हास्य-व्यंग्य की गहरी छाप छोड़ी. उनकी रचनाएं आज भी लोगों को गुदगुदाने के साथ-साथ सोचने पर मजबूर करती हैं.
साहित्य, संस्कृति और संवेदना के प्रतीक थे ‘कहानी के जादूगर’ चन्द्रधर शर्मा गुलेरी
चन्द्रधर शर्मा गुलेरी, हिंदी साहित्य के 'द्विवेदी युग' के प्रमुख स्तंभों में से एक थे. उन्होंने 'उसने कहा था' जैसी कहानी के माध्यम से आधुनिक हिंदी कहानी की नींव रखी. उनकी विद्वता, भाषाशैली, और लेखन ने उन्हें हिंदी साहित्य के ध्रुव तारा के रूप में स्थापित किया.
ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित होंगे छत्तीसगढ़ के विनोद कुमार शुक्ल, ‘नौकर की कमीज’ उपन्यास से जीता दिल
Naukar Ki Kameez Novel: प्रसिद्ध कवि विनोद कुमार शुक्ल को उनके उपन्यास 'नौकर की कमीज' के लिए ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा, वे छत्तीसगढ़ के ऐसे पहले साहित्यकार हैं.
हिंदी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा; इसे अपनाने के लिए अंग्रेजी का त्याग नहीं, दोस्ताना व्यवहार चाहिए: महेश दर्पण
आज राष्ट्रीय पुस्तक न्यास भारत (NBT) के सभागार में हुए विशेष आयोजन के दौरान 'वर्तमान परिवेश में हिंदी की प्रासंगिकता' विषय पर व्याख्यान दिए गए. इसमें वरिष्ठ पत्रकार महेश दर्पण समेत कई लेखक शामिल हुए.







