सिर्फ मां-बेटी का रिश्ता नहीं, एक औरत की आत्म-पहचान की जंग है अरुंधति रॉय की ये नई किताब
अरुंधति रॉय की ‘मेरी माँ मेरी गैंगस्टर’ एक ऐसी आत्मीय यात्रा है, जिसमें लेखिका अपने जीवन के सबसे जटिल और गहरे रिश्तों में से एक अपनी मां मैरी रॉय के साथ संबंध को नए नजरिए से देखती हैं.
चंदर-सुधा के अमर प्रेम के पीछे छिपा है एक और गहरा सच! ‘गुनाहों का देवता’ के बाद क्यों ज़रूर पढ़ी जानी चाहिए ‘रेत की मछली’?
मेरे द्वारा की गई साहित्यिक समीक्षा: 'गुनाहों का देवता' और 'रेत की मछली' उपन्यासों के झरोखे से मानवीय संबंधों, निश्चल प्रेम और स्त्री की मौन वेदना का एक मार्मिक विश्लेषण.
मोबाइल के शोर के बीच किताबों में सुकून तलाशता मन, पढ़िए.. सुधा और चंदर के बदलते रूप की दास्तां
Gunahon Ka Devta LITERATURE BLOG: स्मार्टफोन के युग में किताबों से जुड़कर कैसा रहा 'गुनाहों का देवता' और 'मुसाफिर कैफ़े' तक का सफर? पढ़िए प्रेम और बदलते रिश्तों पर मेरा विशेष अनुभव.
‘जाति नहीं, कर्म से महान बनता है इंसान’; 75 साल बाद भी क्यों प्रासंगिक है दिनकर की ‘रश्मिरथी’?
रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की कृति ‘रश्मिरथी’ हिंदी साहित्य का एक कालजयी खंडकाव्य है, जो महाभारत के महान योद्धा कर्ण के जीवन, संघर्ष, दान, वीरता और अंतिम बलिदान पर केंद्रित है.
इलाहाबाद पैसेंजर: 90 के दशक के छात्र-जीवन का जीवंत दस्तावेज
यह उपन्यास उन संकरी गलियों और 75 पैसे वाली चाय की खुशबू की वापसी है, जहाँ भविष्य गढ़ा जाता था. 'इलाहाबाद पैसेंजर' महज़ एक कहानी नहीं, बल्कि 1990 के दशक के इलाहाबाद विश्वविद्यालय के उस दौर की जीवंत धड़कन है.
विनोद कुमार शुक्ल की स्मृति में आयोजित हुई सभा, पढ़िए प्रख्यात साहित्यकारों ने उनके योगदान को कैसे किया याद
विनोद कुमार शुक्ल की स्मृति सभा में अशोक वाजपेयी बोले- लेखन और जीवन का अंतर मिटा दिया. सादगी, मासूमियत व प्रतिरोध की भाषा को याद किया गया. ज्ञानपीठ विजेता की विरासत मिली.
श्रीलाल शुक्ल की जन्म शताब्दी: राग दरबारी का अमर स्वर
श्रीलाल शुक्ल की जन्म शताब्दी पर उनकी कालजयी कृति राग दरबारी एक बार फिर हमें स्वतंत्र भारत के ग्रामीण जीवन, सत्ता, भ्रष्टाचार और नैतिक पतन का आईना दिखाती है.
हिंदी के अनूठे रचनाकार विनोद कुमार शुक्ल नहीं रहे; ज्ञानपीठ विजेता ने रायपुर एम्स में तोड़ा दम, पीएम मोदी ने जताया शोक
हिंदी साहित्य के प्रख्यात लेखक विनोद कुमार शुक्ल का 88 वर्ष की आयु में रायपुर में निधन हो गया. पीएम मोदी ने उनके निधन पर दुख जताते हुए इसे साहित्य जगत की क्षति बताया है.
विनोद कुमार शुक्ल: सादगी के शब्दों में जीवन का जादू
प्रख्यात कवि, उपन्यासकार और ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता विनोद कुमार शुक्ल का 88 वर्ष की आयु में निधन हो गया. छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में जन्मे शुक्ल हिंदी साहित्य में सादगी और दार्शनिक गहराई का अद्भुत मिश्रण प्रस्तुत करते थे.
बेगमपुल से दरियागंज: देसी पल्प की दिलचस्प दास्तान
खक- संपादक यशवंत व्यास की हालिया किताब "बेगमपुल से दरियागंज" हिंदी साहित्य की उस अनदेखी, लेकिन जीवंत दुनिया का एक ऐसा दस्तावेज है जो 'पल्प' या लुगदी साहित्य के शौकीनों के लिए किसी खजाने से कम नहीं.







