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India foreign policy

बहुध्रुवीय होती वैश्विक व्यवस्था में भारत की रणनीतिक स्वायत्तता विदेश नीति की अहम ताकत बनकर उभर रही है. BRICS, QUAD और पश्चिम एशिया के देशों के साथ भारत के रिश्ते इस संतुलित दृष्टिकोण को दिखाते हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौर में भारत की विदेश नीति का सबसे अहम पहलू ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ और ‘मल्टी-अलाइनमेंट’ है. भारत एक ओर अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ क्वाड के जरिए हिंद-प्रशांत में सहयोग बढ़ा रहा है, तो दूसरी ओर रूस, चीन और ग्लोबल साउथ के साथ BRICS जैसे मंचों पर भी सक्रिय है.

नई दिल्ली, 21 फरवरी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक में दोनों देशों ने अगले पांच वर्षों में आपसी व्यापार को 20 बिलियन डॉलर से अधिक ले जाने का लक्ष्य तय किया है. बैठक के दौरान कई अहम समझौतों (एमओयू) पर हस्ताक्षर हुए और संयुक्त बयान जारी किया.

वेनेजुएला पर अमेरिकी कार्रवाई को लेकर भारत ने अपनी प्रतिक्रिया स्पष्ट की है. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि भारत इस घटनाक्रम को लेकर चिंतित है और दोनों पक्षों से बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील करता है.

2025 में ग्लोबल साउथ के उभार ने वैश्विक राजनीति की दिशा बदल दी, और इस परिवर्तन के केंद्र में भारत की भूमिका निर्णायक रही.

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान को सख्त और साफ संदेश दिया है। ‘शांति के लिए नेतृत्व’ विषय पर हो रही खुली बहस के दौरान पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर को लेकर एक बार फिर भ्रामक और बेबुनियाद बयान दिया। पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर को विवादित क्षेत्र बताया, जिस पर भारत ने तुरंत कड़ा जवाब दिया।

भारत दौरे के 8 दिन बाद रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन तुर्केमिनिस्तान विजिट पर हैं. 2 दिन के इस विजिट में पुतिन तुर्केमिनिस्तान के साथ-साथ तुर्की से भी संपर्क साधेंगे. तुर्की की एक प्रतिष्ठित मीडिया के मुताबिक राष्ट्रपति एर्दोआन से अश्गाबात नामक स्थान पर वो दोनों लोग मुलाकात करेंगे. आपकी जानकारी के लिए बताते चलें कि कूटनीतिक दुनिया में तुर्की को भारत का दुश्मन देश माना जाता है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 से 18 दिसंबर तक तीन देशों का दौरा करेंगे. जॉर्डन में वह किंग अब्दुल्ला द्वितीय से मुलाकात करेंगे और भारत-जॉर्डन के 75 साल पुराने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेंगे.

विश्व राजनीति की अशांत मिट्टी पर खड़े संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का नैतिक व संस्थागत आधार आज पहले से कहीं अधिक प्रश्नों से घिरा है। जब युद्ध बढ़ते जा रहे हैं, तब शांति का सबसे बड़ा संरक्षक स्वयं अपनी भूमिका सिद्ध करने में असफल दिख रहा है.संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1945-आधारित संरचना आज की बहुध्रुवीय और संघर्षग्रस्त दुनिया में शांति बनाए रखने में सक्षम नहीं रह गई है.वीटो शक्ति का राजनीतिक दुरुपयोग, अप्रतिनिधिक सदस्यता, कमजोर राजनीतिक निरंतरता, असंगठित शांति अभियानों और बड़े मानवीय संकटों पर निष्क्रियता ने UNSC को कठघरे में खड़ा कर दिया है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 और 12 नवंबर 2025 को भूटान की यात्रा पर जाएंगे। यह उनकी चौथी भूटान यात्रा होगी, जो भारत और भूटान के बीच गहरे और भरोसेमंद रिश्तों को दर्शाती है। भूटान भारत की विदेश नीति में एक महत्वपूर्ण सहयोगी रहा है, जहां दोनों देश साझा मूल्यों, आपसी सम्मान और रणनीतिक साझेदारी पर आगे बढ़ रहे हैं।