ये इमेज एआई द्वारा बनाई गई है.
Holi 2026: होली का नाम लेते ही जहन में गुलाल के उड़ते बादल, रंगों की मस्ती और ठिठोली का ख्याल आता है. उत्तर भारत की होली के किस्से तो हर कोई जानता है, चाहे वो बरसाने की लठमार होली हो या अवध की मस्ती. लेकिन, क्या आप जानते हैं कि हमारे ही देश में होली को मनाने के तरीके और नाम इतने अलग हैं कि आपको यकीन ही नहीं होगा? भारत की विविधता की यही खूबसूरती है कि होली सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि भावनाओं का एक ऐसा गुलदस्ता है जिसकी हर पंखुड़ी का रंग अलग है.
बंगाल का ‘दोल उत्सव’: शालीनता ही रंग
पश्चिम बंगाल की होली का अपना अलग ही सुकून है. यहां इसे ‘दोल जात्रा’ या ‘दोल उत्सव’ कहा जाता है. खास तौर पर शांतिनिकेतन की होली तो विश्व प्रसिद्ध है. यहां होली को ‘बसंत उत्सव’ के रूप में मनाया जाता है, जिसकी नींव गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने रखी थी. यहां शोर-शराबे वाली होली के बजाय, पीले रंग के कपड़े पहने छात्र फूलों के नीचे रवींद्र संगीत और शास्त्रीय नृत्य के जरिए वसंत का स्वागत करते हैं. यहां रंग लगाना एक कला है, एक कोमल भाव है जो राधा-कृष्ण के प्रेम के प्रति सम्मान जाहिर करता है.
मणिपुर का ‘याओशांग’
पूर्वोत्तर के मणिपुर में होली का रूप ही बदल जाता है. यहां इसे ‘याओशांग’ कहते हैं. यह कोई एक दिन का त्योहार नहीं, बल्कि पूरे छह दिनों तक चलने वाला उत्सव है. यहां की सबसे खास बात है. सामुदायिक जुड़ाव. बच्चे घर-घर जाकर चंदा इकट्ठा करते हैं और फिर सामूहिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं. पारंपरिक नृत्य, खेल प्रतियोगिताएं और घास-फूस की झोपड़ी जलाने की रस्म इस त्योहार को किसी भी अन्य होली से बिल्कुल अलग और प्रेरणादायक बनाती है.
गोवा का ‘शिग्मोत्सव’: लोक परंपराओं का जश्न
गोवा में होली का मतलब केवल बीच पर पार्टियां नहीं हैं. यहां के स्थानीय लोग इसे ‘शिग्मोत्सव’ के रूप में मनाते हैं, जो उनकी खेती-किसानी और लोक संस्कृति से गहराई से जुड़ा है. यहां रंगों के साथ-साथ भव्य जुलूसों का बोलबाला होता है. गांव-गांव में ढोल-नगाड़ों की थाप पर पौराणिक झांकियां निकलती हैं, जो अच्छाई की जीत का संदेश देती हैं. यह त्योहार पर्यटकों के लिए गोवा की संस्कृति को करीब से देखने का सबसे शानदार मौका होता है.
‘होला मोहल्ला’: साहस और वीरता की मिसाल
पंजाब के आनंदपुर साहिब की होली तो पूरी दुनिया से अलग है. यहां इसे ‘होला मोहल्ला’ कहते हैं. इसकी शुरुआत 1701 में दसवें सिख गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी ने की थी. यहां होली का मतलब केवल रंग नहीं, बल्कि ‘युद्ध कौशल’ है. ‘होला’ का अर्थ है हमला और ‘मोहल्ला’ का अर्थ है जुलूस. यह सिखों की वीरता, अनुशासन और शौर्य को प्रदर्शित करने का दिन है. यहां आपको रंगों से ज्यादा घुड़सवारी, तलवारबाजी और साहस का प्रदर्शन देखने को मिलेगा.
ये भी पढ़ें: होली के बाद बदलेगा देश का मिजाज: इन राज्यों में बढ़ेगी तपिश, कहीं होगी मूसलाधार बारिश! जानें अपने शहर का हाल
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.




