बाबा साहेब पार्ट-2: नौकरी छूटी, सियासी एंट्री; लेबर पार्टी से संविधान सभा तक कैसे बदली अपनी किस्मत?
Ambedkar Jayanti 2026: सकपाल से आंबेडकर बनने के बाद, यह भाग भीमराव के उस कठिन शैक्षणिक सफर पर है जहां उन्होंने विदेशों में ज्ञान अर्जित किया. बड़ौदा रियासत की नौकरी से लेकर देश के पहले कानून मंत्री बनने तक का यह सफर उनके संघर्ष और राजनीतिक उदय की कहानी है. पढ़ें कैसे एक दलित छात्र अपनी विद्वता के दम पर सत्ता के शिखर तक पहुंचा और सामाजिक न्याय के लिए 'स्वतंत्र लेबर पार्टी' जैसी नींव रखी.
बाबा साहेब पार्ट-1: क्या हम संविधान के इतर अपने महानायक को जानते हैं? पढ़ें सकपाल से आंबडवेकर फिर आंबेडकर बनने की कहानी
Ambedkar Jayanti 2026: आज देश भारतीय संविधान के मुख्य वास्तुकार भीमराव आंबेडकर की जयंती मना रहा है. बड़े आयोजन किए जा रहे हैं. लेकिन, सवाल ये क्या वाकई आंबेडकर को कोई संविधान के इतर भी जानता है या उन्हें केवल सियासी तौर पर उपयोग कर लिया जा रहा है.आइये 3 पार्ट में जानें सकपाल से आंबडवेकर और आंबेडकर बनने फिर उसके बाद बाबा साहेब बनने की कहानी?
भारत का वो प्रदेश जो दो बार हुआ आजाद: जानिए पुडुचेरी की कहानी
पुडुचेरी भारत का एक अनोखा केंद्रशासित प्रदेश है, जो अपने फ्रांसीसी इतिहास, बिखरी भौगोलिक संरचना और दो बार आजादी पाने की खास पहचान के लिए जाना जाता है. इसे ‘मिनी फ्रांस’ भी कहा जाता है क्योंकि यहां आज भी फ्रांसीसी संस्कृति की झलक साफ दिखाई देती है.
भारत 1000 साल गुलाम क्यों रहा? IIMT ‘भारत फिल्म फेस्टिवल’ में CMD उपेन्द्र राय ने बताई वजह
ग्रेटर नोएडा के भारत फिल्म फेस्टिवल में CMD उपेन्द्र राय ने 'भारत की बात सुनाता हूं' विषय पर ऐतिहासिक और दार्शनिक विचार रखे. जानें उन्होंने गीता, मोक्ष और विदेशी आक्रांताओं पर क्या कहा?
गृह मंत्री अमित शाह ने ‘हिंदवी स्वराज’ के महानायक को किया नमन, बताया क्यों आज भी प्रासंगिक है उनकी नौसेना रणनीति
छत्रपति शिवाजी महाराज की पुण्यतिथि पर अमित शाह ने दी श्रद्धांजलि. जानिए क्यों गृह मंत्री उन्हें 'रणनीतिक कौशल' और 'नौसेना शक्ति' का प्रतीक मानते हैं और क्या है उनके 'हिंदवी स्वराज' का असली संदेश.
भट्टी राजपूतों के बलिदान और मुगलों के हमलों की गवाही देता भटनेर किला, 1700 साल पुरानी विरासत आज भी अडिग
राजस्थान की धरती वीरता और शौर्य की कहानियों से भरी पड़ी है. इन्हीं ऐतिहासिक धरोहरों में शामिल है भटनेर का किला, जिसे आज हनुमानगढ़ किले के नाम से जाना जाता है. राजपूतों से लेकर मुगलों तक कई शासकों ने इस किले पर राज किया, लेकिन सदियों के आक्रमणों के बावजूद यह किला आज भी मजबूती से खड़ा है और अपने गौरवशाली इतिहास की गवाही देता है.
मसालों के लिए महायुद्ध: दीव की लहरों पर पुर्तगालियों ने बदला इतिहास, 500 साल पहले ऐसे पड़ा था गुलामी का बीज
क्या आप जानते हैं कि भारत में यूरोपीय गुलामी की नींव एक 'मसाला युद्ध' से पड़ी थी? 3 फरवरी 1509 को दीव के तट पर लड़ी गई वह नौसैनिक जंग, जहाँ काली मिर्च और लौंग के व्यापार पर कब्जे के लिए दुनिया की महाशक्तियां आपस में भिड़ गई थीं.
Independence day और Republic day पर झंडा फहराने का तरीका अलग क्यों है? जानें वजह
15 अगस्त 1947 और 26 जनवरी 1950 ये दोनों दिन भारत के इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन दोनों राष्ट्रीय पर्वों पर तिरंगा फहराने के नियम अलग-अलग होते हैं? इस वीडियो में जानिए ध्वजारोहण और Flag Unfurling का अंतर, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति की भूमिका के पीछे का कारण, और लाल किले पर फहराए जाने वाले तिरंगे की रस्सी से जुड़ी एक अनोखी परंपरा. यह कहानी सिर्फ झंडे की नहीं, बल्कि भारत की आज़ादी और संविधान की आत्मा की है.
355 वोट और एक नया इतिहास: लाल बहादुर शास्त्री के निधन के बाद कैसे ‘गूंगी गुड़िया’ से ‘आयरन लेडी’ बनीं इंदिरा
19 जनवरी 1966 का दिन भारतीय लोकतंत्र के लिए एक क्रांतिकारी मोड़ था. लाल बहादुर शास्त्री के निधन के बाद उपजे राजनीतिक शून्य को भरने के लिए कांग्रेस के भीतर पहली बार गुप्त मतदान के जरिए चुनावी जंग हुई. एक तरफ अनुभवी मोरारजी देसाई थे, तो दूसरी तरफ नेहरू की विरासत संभाल रहीं इंदिरा गांधी.
‘गुमनामी बाबा’ के कमरे से निकले सामान ख़ास क्यों हैं?
गुमनामी बाबा के कमरे से निकली 2760 वस्तुएं आज भी रहस्य बनी हुई हैं. इनमें महंगी घड़ियाँ, विदेशी पाइप, नेताजी के परिवार की तस्वीरें, दुर्लभ नक्शे और 1600 से अधिक पत्र शामिल हैं. क्या ये सबूत साबित करते हैं कि गुमनामी बाबा ही नेताजी थे?







