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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सेशेल्स यात्रा ने भारत और इस हिंद महासागर देश के पुराने रिश्तों को फिर चर्चा में ला दिया है. करीब चार दशक पहले भी भारत ने सेशेल्स की सुरक्षा चिंताओं को दूर करने में अहम भूमिका निभाई थी.

प्रधानमंत्री Narendra Modi सेशेल्स की 50वीं स्वतंत्रता वर्षगांठ में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होकर हिंद महासागर में भारत की रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती दे रहे हैं. 'MAHASAGAR' विजन के जरिए भारत समुद्री सुरक्षा, विकास और क्षेत्रीय सहयोग पर अपना फोकस मजबूत कर रहा है...

PM Modi Seychelles Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 27 से 29 जून तक सेशेल्स की राजकीय यात्रा पर रहेंगे और राष्ट्रीय दिवस की स्वर्ण जयंती समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे. यात्रा के दौरान पीएम मोदी राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी से मुलाकात करेंगे और दोनों देश समुद्री सुरक्षा, क्षेत्रीय सहयोग और द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा करेंगे.

मध्य पूर्व तनाव के बीच नई रिपोर्ट में भारत को हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री निगरानी और सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने की सलाह दी गई है. रिपोर्ट ने कहा कि भारत को क्षेत्रीय मंचों के जरिए पड़ोसी देशों के साथ मिलकर सुरक्षा ढांचा तैयार करना चाहिए.

नई दिल्ली के जेएनयू में 6वें हिमालय–हिंद महासागर राष्ट्र समूह (HHRS) अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 2026 का भव्य शुभारंभ हुआ है. दो दिवसीय सम्मेलन में भारत की हिंद महासागर क्षेत्र में भू-राजनीतिक, सामरिक और सांस्कृतिक महत्ता पर व्यापक चर्चा हुई.

अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने यूके (ब्रिटेन) की डिएगो गार्सिया को मॉरीशस सौंपने की योजना को 'बड़ी मूर्खता' करार दिया है. Britain दशकों बाद Mauritius को Chagos Island लौटाने वाला था, इन्हीं में डिएगो गार्सिया शामिल है, जो अमेरिका-ब्रिटेन का अहम सैन्य ठिकाना है.

यह जहाज़ इस समय अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के पास देखा गया है और अब यह पश्चिम की ओर, अरब सागर की दिशा में बढ़ रहा है. इसी क्षेत्र में भारतीय नौसेना के विमानवाहक पोत INS Vikrant, रणनीतिक पनडुब्बियां और कई युद्धपोत तैनात हैं.

Meteorological Cooperation: भारत की जलरूपविज्ञान और मौसम विज्ञान कूटनीति IOR में स्थिरता और सहयोग का नया मॉडल बन रही है. सहयोग, पारदर्शिता और प्रशिक्षण पर आधारित यह नीति क्षेत्रीय देशों को सशक्त कर रही है.

Climate Change: रिपोर्ट में बताया गया है कि उष्मा की मात्रा में भविष्य में होने वाली वृद्धि एक परमाणु बम (हिरोशिमा में हुए) विस्फोट से उत्पन्न होने वाली ऊर्जा के समान होगी.

यूं तो पृथ्वी के 70% से ज्यादा हिस्से पर जलवायु है, महज 30% भूमि है..मगर इसके बावजूद इसी दुनिया में लाखों-करोड़ों लोग पेयजल को तरसते हैं. समुद्र में कचरा बहुत हो गया है. स्वच्छ जल के लिए जरूरी है नदियाँ साफ की जाएं, इसीलिए शुरू हुई खास पहल —