“लोकतांत्रिक सिद्धांतों की अवहेलना…देश को जेलखाना बना दिया”, इमरजेंसी की 50वीं बरसी पर पीएम मोदी का कांग्रेस पर हमला
पीएम मोदी ने लिखा, सत्ता पर टिके रहने के लिए तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने हर लोकतांत्रिक सिद्धांत की अवहेलना की और देश को जेलखाना बना दिया.
“50 साल पहले लोकतंत्र पर काला धब्बा लगा था”, संसद सत्र से पहले पीएम मोदी बोले- तीसरे कार्यकाल में करेंगे तीन गुणा ज्यादा काम
भारत के लोकतंत्र पर जो काला धब्बा लगा था, कल उसके 50 साल हो रहे हैं. भारत की नई पीढ़ी इस बात को कभी नहीं भूलेगी कि भारत के संविधान को पूरी तरह नकार दिया गया था.
Lok Sabha Election Results 2024: Indira Gandhi के हत्यारों में से एक के बेटे ने Punjab से दर्ज की जीत
तत्कालीन प्रधानमंत्री के अंगरक्षक बेअंत सिंह और सतवंत सिंह ने 31 अक्टूबर 1984 को इंदिरा गांधी की उनके आवास पर हत्या कर दी थी. इनमें से एक के बेटे ने फरीदकोट सीट से जीत दर्ज की है.
Siyasi Kissa: जब एक चुनावी रैली के दौरान देश के पूर्व प्रधानमंत्री की कर दी गई थी नृशंस हत्या
ये वो समय था, जब 10वीं लोकसभा के लिए देश में चुनाव हो रहे थे. ये राजनीतिक अस्थिरता का दौर था और अर्थव्यवस्था भी गहरे संकट से गुजर रही थी.
Siyasi Kissa: क्या एक पार्टी के दौरान इंदिरा गांधी पर उनके बेटे संजय गांधी ने हाथ उठाया था?
इमरजेंसी के दौरान पुलित्जर पुरस्कार से सम्मानित अमेरिकी पत्रकार लुईस एम. सिमंस को भारत से निर्वासित कर दिया गया था. उस जमाने में उन्होंने अमेरिकी अखबार वॉशिंगटन पोस्ट के लिए एक खबर लिखी थी, जिसमें बताया था कि एक पार्टी के दौरान संजय गांधी ने अपनी मां इंदिरा गांधी को थप्पड़ मार दिया था.
चुनावी नारा: जमीन गई चकबंदी में, मकान गया हदबंदी में, द्वार खड़ी औरत चिल्लाए, मरद गया नसबंदी में
आपातकाल के दौरान नागरिक स्वतंत्रता और अधिकारों को निलंबित कर दिया गया था. इसी दौरान इंदिरा गांधी के बेटे संजय गांधी ने नसबंदी का एक विवादास्पद अभियान चला रखा था. उसी दौरान यह नारा काफी चर्चित हुआ था.
Siyasi Kissa: जब बेटे के फोटो कांड ने बाबू जगजीवन राम से छीन लिया था प्रधानमंत्री बनने का मौका!
इंदिरा गांधी 1977 के आम चुनावों में हार चुकी थीं और सत्ता में दोबारा वापसी के लिए तमाम गुणा-गणित लगा रही थीं. इन सबके बीच तत्कालीन जनता पार्टी की सरकार में उप-प्रधानमंत्री बाबू जगजीवन राम का दावा भी प्रधानमंत्री पद के लिए मजबूत माना जा रहा था.
Siyasi Kissa: एक फिल्म के चलते जब देश में मच गया था बवाल, प्रधानमंत्री के बेटे को हुई थी जेल
फिल्म ‘किस्सा कुसी का’ का निर्देशन अमृत नाहटा ने किया था. यह एक राजनीतिक व्यंग्य थी. फिल्म में शबाना आजमी, उत्पल दत्त, रेहाना सुल्तान, सुरेखा सीकरी और राज किरण प्रमुख भूमिकाओं में थे.
Siyasi Kissa: मॉडल और पत्रकार रह चुकीं मेनका गांधी का इस तरह शुरू हुआ था राजनीतिक करिअर, पहली बार दिखी थीं इस विज्ञापन में
भाजपा सांसद मेनका गांधी कभी कॉलेज में होने वाले ब्यूटी कॉन्टेस्ट में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती थीं. महज 17 साल की उम्र में उन्होंने पहला विज्ञापन किया था. एक शादी पार्टी में उनकी संजय गांधी से मुलाकात हुई थी.
भाजपा, चुनावी बॉन्ड और राजनीतिक फंडिंग का विकास
यह स्वीकार करना आवश्यक है कि राजनीतिक फंडिंग में भाजपा का प्रभुत्व उसकी चुनावी सफलता और लोकप्रियता का प्रतिबिंब है। हालाँकि, इसे एक जीवंत और प्रभावी विपक्ष की आवश्यकता पर हावी नहीं होना चाहिए। इमरजेंसी और गठबंधन की राजनीति के दौर में ऐतिहासिक प्रसंगों से मिले सबक, राष्ट्र के लोकतांत्रिक ढांचे की सुरक्षा के लिए नियंत्रण और संतुलन के महत्व को रेखांकित करते हैं।







