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कान्हा की जन्मभूमि के पास क्यों विराजमान हैं भूतेश्वर महादेव? जानिए इस प्राचीन शिवालय का रामायण काल से जुड़ी कहानी

भगवान श्रीकृष्ण व देवाधिदेव महादेव के बीच प्रगाढ़ प्रेम को दर्शाते देश-विदेश में कई देवालय हैं. इन मंदिरों में भक्ति के साथ शक्ति के अद्भुत मिलन के साथ ही भक्ति का बेहद सरल स्वरूप भी देखने को मिलता है. ऐसा ही ही दिव्य मंदिर उत्तर प्रदेश के श्रीकृष्ण नगरी मथुरा में है.

Shri Krishna Janmashtami 2026 History And Significance Of Bhuteshwar Mahadev Temple Mathura Bharat Express
Vijay Ram Edited by Vijay Ram

परमेश्वर के दिव्य मनुज अवतार ‘श्रीकृष्ण’ का इस बार 5253वां जन्मोत्सव है. 4 सितंबर को करोड़ों हिंदु अनुयायी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाएंगे. इस अवसर पर BharatExpress.Com पर बीते एक हफ्ते से विशेष प्रस्तुति दी जा रही है. इस आलेख में कीजिए उस मंदिर के दर्शन, जहां कैलाश पर्वत से कान्हा को देखने ब्रज में आए थे स्वयं महादेव….

यह दिव्य मंदिर श्रीकृष्ण नगरी मथुरा में है, जहां महादेव शिव शंकरजी शहर के कोतवाल या रक्षक के रूप में विराजमान हैं. उत्तर प्रदेश का पर्यटन विभाग मंदिर के बारे में जानकारी देने के साथ ही वहां के महत्व से भी अवगत कराता है. भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा केवल कृष्ण भक्ति का केंद्र नहीं है, बल्कि महादेव की अनन्य भक्ति का भी पावन साक्षी है. यहां स्थित प्राचीन श्री भूतेश्वर महादेव मंदिर सदियों पुरानी आस्था और अटूट विश्वास का प्रतीक है. पर्यटन विभाग इस शिवालय को मथुरा की यात्रा का अनिवार्य हिस्सा बताता है.

भूतेश्वर महादेव के दर्शन के बिना अधूरी रहेगी यात्रा

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव मथुरा के क्षेत्रपाल (रक्षक) के रूप में विराजमान हैं. कहा जाता है कि जब भगवान श्रीकृष्ण बाल स्वरूप में अवतरित हुए तो महादेव स्वयं कैलाश पर्वत से मथुरा पधारे थे. वे कृष्ण के बाल लीला के दर्शन करना चाहते थे. इसी कारण मथुरा की कोई भी यात्रा भूतेश्वर महादेव के दर्शन के बिना अधूरी मानी जाती है. मंदिर में स्वयंभू शिवलिंग स्थापित है, जिसे केदारनाथ का उपलिंग भी माना जाता है. मथुरा की जन्मभूमि से मात्र 500 मीटर की दूरी पर स्थित यह मंदिर शहर को बुरी शक्तियों से बचाने वाला माना जाता है.

क्या है शिवालय को लेकर मान्यता?

शिवालय के बारे में प्रचलित मान्यता है कि भूतेश्वर महादेव यहां रहकर मथुरा और उसके निवासियों की रक्षा करते हैं, इसलिए इनका नाम भूतेश्वर या भूतों के स्वामी पड़ा. मंदिर की एक और रोचक कथा मथुरा की स्थापना से जुड़ी है. पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, श्री राम के छोटे भाई शत्रुघ्न ने मधु नामक राक्षस का वध किया और उसके बाद मथुरा शहर की स्थापना की. इसी ऐतिहासिक और पावन भूमि पर भूतेश्वर महादेव मंदिर हजारों वर्षों से मौजूद है. यह मथुरा का सबसे पुराना मंदिर माना जाता है.

स्थानीय लोग मानते हैं कि भूतेश्वर महादेव मंदिर शहर को नकारात्मक शक्तियों और बुरी नजर से बचाता है. यहां महादेव का जागृत स्वरूप और मनमोहक श्रृंगार भक्तों को असीम शांति और आत्मिक शक्ति प्रदान करता है. भक्तों का विश्वास है कि भूतेश्वर महादेव के दर्शन से मन की सारी चिंताएं दूर हो जाती हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.

कब खुलता है मंदिर?

भूतेश्वर महादेव मंदिर में प्रवेश के लिए कोई शुल्क नहीं है. मंदिर प्रतिदिन शाम 4 बजे से रात 9:30 बजे तक खुला रहता है. मंदिर गर्रावकेंद्र के पास स्थित है. निकटतम बस स्टॉप शांति नगर स्थित मथुरा बस स्टॉप है, जो मंदिर से लगभग 1.5 किलोमीटर दूर है. बस स्टॉप से मंदिर पहुंचने में ज्यादा समय नहीं लगता है. ऑटो, ई-रिक्शा या टैक्सी आसानी से उपलब्ध है.

वहीं, रेलवे स्टेशन मथुरा जंक्शन है, जो मंदिर से मात्र 3 किलोमीटर दूर है. दिल्ली, आगरा, जयपुर, लखनऊ आदि शहरों से मथुरा जंक्शन पर ट्रेनें उपलब्ध हैं. निकटतम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा दिल्ली (इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा) है, जो मथुरा से लगभग 147 किलोमीटर दूर है. दिल्ली से सड़क मार्ग द्वारा टैक्सी या बस से मथुरा पहुंचा जा सकता है.

-भारत एक्सप्रेस

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