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shri Krishna

भगवान श्रीकृष्ण की लीलाएं और उनके भक्ति भाव भारतीय संस्कृति का अहम हिस्सा हैं. बॉलीवुड ने ‘यशोमति मैया से पूछे नंदलाला’, ‘बड़ा नटखट है कृष्ण कन्हैया’ और ‘मोहे पनघट पे’ जैसे गीतों के माध्यम से कृष्ण की शरारत, प्रेम और भक्ति को संगीत में जीवंत किया है.

इस साल श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर भ्रम है कि यह 16 अगस्त को मनाई जाएगी या 17 अगस्त को. मथुरा और काशी के पंचांग के अनुसार 16 अगस्त को ही जन्माष्टमी का भव्य उत्सव होगा.

Krishna Janmashtami 2025: लगभग 5 हजार वर्ष पूर्व श्रीकृष्ण और बलराम ने चाणूर-मुष्टिक जैसे राक्षसों को अखाड़े में पराजित कर राक्षसराज कंस का वध किया और मथुरा नगरी को अत्याचार से मुक्त किया.

भगवान श्रीकृष्ण ने अपना विराट रूप दिखाते समय अर्जुन को बतलाया था कि वह कुरुक्षेत्र में सभी पापियों को नष्ट करने के लिए प्रकट हुए हैं, क्योंकि उन्हें उस समय धरती से अधर्म का नाश करना था, इसलिए उन्होंने करोड़ों योद्धाओं को युद्ध के जरिए मुक्ति दी.

हमारे पौराणिक इतिहास में “सहस्त्रबाहु” (1 हजार हाथों वाले) या हज़ार भुजाओं की शक्ति वाले योद्धाओं के नाम आते हैं. मौजूदा युग से पहले त्रेता और द्वापर युग में ऐसे बाहुबली भी थे जिनके 1 हजार भुजाएं थीं, और कइयों में तो 1-1 हजार हाथियों जितना बल था.

Holi 2025 @ Krishna Leela: श्री राधा-कृष्ण की बाल लीलाएं प्रेम, भक्ति और दिव्य आनंद से भरपूर हैं. इन लीलाओं में भक्ति का मार्ग और अलौकिक प्रेम का संदेश मिलता है, जो सबके लिए मंगलकारी है.

श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मामले में उच्‍च न्‍यायालय (इलाहाबाद हाईकोर्ट) से मुस्लिम पक्ष को तब बड़ा झटका लगा, जब शाही ईदगाह मस्जिद कमेटी की रिकॉल अर्जी खारिज कर दी गई. अब ईदगाह कमेटी सुप्रीम कोर्ट में अपील करेगी.

Krishna Janmabhoomi News: मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की याचिका खारिज कर दी. हाईकोर्ट ने कहा कि हिंदू पक्ष की ओर से दायर 18 याचिकाएं एक साथ सुनी जाएंगी.

Krishna Janmabhoomi Shahi eidgah Mosque Case: कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद मामले पर प्रयागराज स्थित उच्च न्यायालय में सुनवाई चल रही है. इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति मयंक कुमार जैन द्वारा की जा रही है.

मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह विवाद के सभी मुकदमे एक ही तरह के हैं, जिनमें एक ही तरह के सबूतों के आधार पर फैसला होना है. लिहाजा, सालभर पहले उच्च न्यायालय ने कहा था कि कोर्ट का समय बचाने के लिए ये बेहतर होगा कि सभी मुकदमों पर एक साथ सुनवाई हो.