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Voter Verification

SIR के तहत मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण को लेकर देश के कई हिस्सों में सवाल उठ रहे हैं. चुनाव आयोग इसे मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाने की प्रक्रिया बता रहा है, लेकिन बड़ी संख्या में नामों की जांच, नोटिस और पुराने रिकॉर्ड से मिलान की प्रक्रिया ने आम मतदाताओं की चिंता बढ़ा दी है.

पश्चिम बंगाल में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) राजनीतिक विवाद का बड़ा कारण बन गया है। जहां कई राज्यों में SIR प्रक्रिया पूरी करने की समय-सीमा बढ़ाई गई है, वहीं बंगाल में किसी प्रकार की तारीखों में ढील न देने से चुनाव आयोग के फैसलों पर सवाल उठने लगे हैं।

उत्तर प्रदेश में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के लिए समय बढ़ाने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 9 दिसंबर को सुनवाई करेगा.

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में चल रहे एसआईआर (Special Summary Revision) मामले में हिंदू, बांग्लादेश से आए बौद्ध और ईसाइयों की ओर से दायर नई अर्जी पर चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है और जवाब मांगा है.

सुप्रीम कोर्ट 13 अक्टूबर को राहुल गांधी द्वारा दायर वोट चोरी आरोपों की एसआईटी जांच याचिका पर सुनवाई करेगा. याचिका में बेंगलुरु सेंट्रल 2024 लोकसभा चुनाव में मतदाता सूची हेराफेरी के आरोप और सूची पर रोक की मांग की गई.

सुप्रीम कोर्ट ने बिहार ड्राफ्ट मतदाता सूची में बड़ी संख्या में लोगों को मृत दिखाए जाने पर चिंता व्यक्त की. कोर्ट ने नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा पर जोर देते हुए 65 लाख लोगों का विवरण 19 अगस्त तक सार्वजनिक करने का आदेश दिया हैं.

बिहार में SIR को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है. अब एनडीए की सहयोगी पार्टी टीडीपी ने भी इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए चुनाव आयोग को पत्र लिखा है.