उत्तर प्रदेश में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के लिए दिए गए समय को बढ़ाने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 9 दिसंबर को सुनवाई करेगा. भारतीय किसान यूनियन आजाद ट्रस्ट की ओर से दाखिल की गई है, जिसमें मतदाता सूची के संशोधन के लिए कम से कम तीन महीने का अतिरिक्त समय देने की मांग की गई है.
दायर याचिका में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में सिर्फ चार हफ्ते में एसआईआर पूरा करना प्रशासनिक रूप से पूरी तरह असंभव है. राज्य में कुल 15.35 करोड़ मतदाता है. इतने कम समय में नाम जोड़ने, हटाने और सुधार करने की प्रक्रिया पूरी नही हो पाएगी. इससे लाखों करोड़ों लोगों के नाम मतदाता सूची से कट जाने का गंभीर खतरा है. जो लोकतंत्र के लिए ठीक नही है. निर्वाचन आयोग ने उत्तर प्रदेश में चार नवंबर को एसआईआर की प्रक्रिया शुरू की थी.
सुप्रीम कोर्ट में तय होगी समय सीमा
अधिकारियों ने बताया कि इस अभियान के तहत बीएलओ चार दिसंबर तक हर घर जाकर मतदाताओं के विवरण की जांच और उसे अद्यतन करने का काम करेंगे. चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश में एसआईआर की तारीख एक.दिसंबर 2025 से शुरू करके 6 जनवरी 2026 तक रखी है. अब सुप्रीम कोर्ट को तय करना है कि इसकी समय सीमा बढ़ाई जाए या नही.
केंद्रीय चुनाव आयोग ने 27 अक्टूबर को केरल समेत 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों की शुद्धि का अभ्यास शुरू करने के खिलाफ दायर याचिका में आईयूएमएल महासचिव पीके कुन्हालिकुट्टी ने कहा कि वैध और मौजूदा मतदाता सूची को दोबारा तैयार करने का यह व्यापक प्रयास अनुचित और मनमाना है.
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-भारत एक्सप्रेस
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