USCIS Green Card New Rules: अमेरिका में रहकर ग्रीन कार्ड यानी स्थायी नागरिकता का इंतजार कर रहे लाखों विदेशी नागरिकों, खासकर भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स और छात्रों के लिए एक बेहद परेशान करने वाली खबर है. अमेरिकी नागरिकता और आप्रवासन सेवा (USCIS) ने एक नया पॉलिसी मेमो जारी किया है. इसके तहत अब अमेरिका में रहते हुए ‘स्टेटस में बदलाव’ कराना बेहद मुश्किल होने वाला है. नए नियमों के मुताबिक, ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए आवेदकों को वापस अपने देश जाकर ‘कांसुलर प्रोसेसिंग’ का रास्ता अपनाना होगा.
सरल शब्दों में कहें तो, अब अमेरिका में बैठे-बैठे ग्रीन कार्ड मिलना गुजरे जमाने की बात हो सकती है. भारतीय आवेदकों को अब वापस भारत आकर ही इस प्रक्रिया को अमली जामा पहनाना होगा.
कानून के मूल मकसद की ओर वापसी
USCIS के प्रवक्ता ज़ैक काहलर ने इस नए कदम की वजह साफ करते हुए कहा कि सरकार इमिग्रेशन सिस्टम की कमियों का फायदा उठाने की प्रवृत्ति को रोकना चाहती है. उन्होंने साफ किया कि जो लोग टूरिस्ट, स्टूडेंट या वर्किंग वीजा पर आते हैं, वे एक तय समय और खास मकसद के लिए अमेरिका आते हैं. अब नियमों को सख्त करके यह सुनिश्चित किया जाएगा कि लोग तय प्रक्रिया का पालन करें. इससे उन लोगों पर भी लगाम लगेगी जो वीजा खत्म होने के बाद अमेरिका में अवैध रूप से छिपकर रहने लगते हैं.
हालांकि, इस नियम में कुछ बेहद खास परिस्थितियों में छूट का प्रावधान रखा गया है, लेकिन आम आवेदकों के लिए रास्ता कठिन हो गया है.
H-1B और L-1 वीजा धारकों की बढ़ी टेंशन
इमिग्रेशन मामलों की एक्सपर्ट और वकील निकोल गुरनारा के अनुसार, तकनीकी तौर पर अमेरिका में रहकर स्टेटस बदलवाना हमेशा से अधिकारियों के विवेक पर निर्भर करता था, लेकिन पहले अधिकारी इस पर आंख मूंदकर मंजूरी दे देते थे. अब ऐसा नहीं होगा.
इस मेमो का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा एक फुटनोट में छिपा है. इसके मुताबिक, अगर आप अमेरिका में वैध H-1B या L-1 स्टेटस में हैं, समय पर टैक्स भर रहे हैं और सारी शर्तें पूरी करते हैं, तो भी यह इस बात की गारंटी नहीं है कि आपका ग्रीन कार्ड मंजूर हो ही जाएगा. अब सिर्फ ‘योग्य’ होना काफी नहीं होगा, बल्कि आवेदकों को यह साबित करना होगा कि वे अमेरिका के लिए कितने जरूरी हैं.
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दोहरे इरादे पर उठेगा सवाल
नये नियम का सबसे बुरा असर F-1 वीजा पर पढ़ रहे छात्रों पर पड़ सकता है. F-1 वीजा ‘दोहरे इरादे’ (Dual Intent) की अनुमति नहीं देता. यानी छात्र ने वीजा लेते समय अमेरिकी दूतावास को वचन दिया था कि वह पढ़ाई खत्म करके भारत लौट आएगा. अब जब वही छात्र ग्रीन कार्ड के लिए अप्लाई करेंगे, तो अधिकारी उनके पुराने बयानों और मौजूदा इरादों की कड़ाई से जांच करेंगे.
परिवारों के लिए एक उम्मीद की किरण
इस कड़े मेमो में उन भारतीयों के लिए थोड़ी राहत की बात भी है जो EB-2 या EB-3 कैटेगरी में पिछले 10 से 15 सालों से इंतजार कर रहे हैं. नए नियमों में अधिकारियों को ‘सकारात्मक पहलुओं’ को देखने का निर्देश दिया गया है.
इसका मतलब यह है कि अगर कोई भारतीय परिवार सालों से अमेरिका में रह रहा है, उसका टैक्स रिकॉर्ड साफ है, बच्चों की शिक्षा वहीं हो रही है, और समाज में उनकी अच्छी भागीदारी है, तो इन बातों को उनके पक्ष में गिना जाएगा. ऐसे आवेदकों को सलाह दी गई है कि वे अपने करियर की तरक्की, सामाजिक काम और पारिवारिक रिश्तों के मजबूत दस्तावेज तैयार रखें ताकि अधिकारियों के विवेक का फायदा उन्हें मिल सके.
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-भारत एक्सप्रेस
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