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शादी कर लेने से किसी की जाति नहीं बदलती,भले ही धर्म ही क्यों न बदल ले- हाई कोर्ट

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि विवाह या धर्म परिवर्तन से किसी व्यक्ति की जन्मजात जाति नहीं बदलती है.

Allahabad High Court

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में कहा है कि विवाह से किसी व्यक्ति की जाति नहीं बदलती, भले ही वह धर्म ही क्यों न बदल ले. एससी-एसटी केस में आरोपित दिनेश कुमार व आठ अन्य की आपराधिक अपील खारिज करते हुए न्यायमूर्ति अनिल कुमार दशम ने यह टिप्पणी की है.

अपीलार्थियों ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 14-ए(1) के तहत विशेष न्यायाधीश, एससी/एसटी अधिनियम, अलीगढ़ द्वारा 27 जुलाई को जारी समन को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. सभी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 323, 506, 452 और 354 तथा एससी/एसटी अधिनियम की धारा 3(1)(आर) में खैर थाने में केस दर्ज किया गया है. अपीलार्थियों के वकील ने प्रतिवादी/शिकायतकर्ता पर झूठे मामले में फंसाए जाने का आरोप लगाया. कहा कि शिकायतकर्ता और उसके परिवार के सदस्यों के खिलाफ सात सितंबर को मारपीट व अन्य धाराओं में एफआइआर दर्ज कराई गई थी.

एससी-एसटी एक्ट केस में नई बहस

चोटों की रिपोर्ट रिकॉर्ड में मौजूद है. वादी मुकदमा मूलतः बंगाल की निवासी है, जहां वह अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति समुदाय से संबंध रखती है, लेकिन उसका विवाह जाट समुदाय के व्यक्ति से हुआ है परंतु इस तथ्य को छिपाते हुए स्वयं को अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति समुदाय की महिला होने का दावा किया है. एक बार जब उसने जाट समुदाय के व्यक्ति से विवाह कर लिया, तो वह स्वयं को अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति समुदाय की महिला होने का दावा नहीं कर सकती. अन्य जाति के व्यक्ति से विवाह करने के बाद अपनी मूल जाति खो देती है, जो वह जन्म से धारण करती आ रही है. इसलिए अन्य धाराओं में अपराधों के साथ ही साथ अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अधिनियम के तहत तलब करना अनुचित है और इसे रद किया जाना चाहिए.

हाई कोर्ट ने किया टिप्पणी

सरकार के लिए एजीए और शिकायतकर्ता के वकील ने अपील बलहीन बताया और कहा कि वादी मुकदमा सहित तीन लोग घायल हुए. जाति सूचक गाली दी गई. कोर्ट ने पाया कि अधीनस्थ अदालत द्वारा अपीलार्थियों को तलब करने में कोई अवैधता नहीं है. कोर्ट ने यह दावा निराधार माना कि जाट समुदाय के व्यक्ति से शादी करने के बाद वादी मुकदमा ने जाति खो दी है. कहा, भले ही कोई व्यक्ति धर्म बदल ले, लेकिन धर्म परिवर्तन के बाद भी उसकी जाति वही रहती है.

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-भारत एक्सप्रेस



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