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बुझ गया BSP का ‘इकलौता चिराग’! मायावती कितने खास थे उमाशंकर सिंह?

उत्तर प्रदेश विधानसभा में बहुजन समाज पार्टी (BSP) के एकमात्र विधायक और बलिया की रसड़ा सीट से लगातार तीन बार जीतने वाले उमाशंकर सिंह का कैंसर से निधन हो गया है. जानिए उनके ‘गरीबों के मसीहा’ बनने और राजनीतिक सफर की पूरी कहानी.

Umashankar Singh Ballia Mayawati BSP

उत्तर प्रदेश की राजनीति और विशेषकर बहुजन समाज पार्टी (BSP) के लिए एक बेहद दुखद खबर सामने आई है. यूपी विधानसभा में बसपा के एकमात्र विधायक उमाशंकर सिंह (Umashankar Singh) का बुधवार देर रात निधन हो गया है. 55 वर्षीय उमाशंकर सिंह पिछले करीब दो सालों से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे. गुरुग्राम के मेदांता (कुछ रिपोर्ट्स में नोएडा का फोर्टिस) अस्पताल में इलाज के दौरान उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली. उनके निधन से लोकसभा के बाद अब यूपी विधानसभा में भी बसपा के विधायकों की संख्या शून्य (0) हो गई है.

प्रचंड मोदी लहर में भी नहीं हारे

बलिया जिले की रसड़ा विधानसभा सीट से उमाशंकर सिंह लगातार तीन बार (2012, 2017 और 2022) विधायक चुने गए. साल 2017 और 2022 की प्रचंड ‘मोदी लहर’ के बावजूद उन्होंने अपनी सीट नहीं गवांई. 2022 के चुनावों में जब पूरे यूपी में बसपा का सूपड़ा साफ हो गया था, तब उमाशंकर सिंह ही वो इकलौते चेहरे थे जिन्होंने पार्टी का खाता खोला था और बसपा की लाज बचाई थी. बसपा सुप्रीमो मायावती खुद उन्हें राखी बांधती थीं और बीमारी के दौरान उनका हालचाल जानने उनके घर तक गई थीं.

बेटियों के ‘पिता’ और बुजुर्गों के ‘बेटे’

उमाशंकर सिंह की असली ताकत किसी पार्टी का सिंबल नहीं, बल्कि उनकी खुद की सादगी और जनता के बीच उनकी छवि थी. पहली बार विधायक बनने पर उन्होंने अपने खर्चे पर 251 गरीब लड़कियों की सामूहिक शादी कराई थी. इसके बाद यह सिलसिला 351 जोड़ों तक पहुंचा. उन्होंने सिर्फ शादियां ही नहीं कराईं, बल्कि उज्जैन महाकाल के लिए दो स्पेशल ट्रेनें बुक करवाकर हजारों बुजुर्गों को मुफ्त दर्शन कराए. मुस्लिम समुदाय के लोगों को अजमेर शरीफ की यात्रा भी कराई. कोरोना काल में उन्होंने अपने खर्चे पर लोगों का इलाज करवाया और ऑक्सीजन सिलेंडर बांटे.

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ठेकेदारी विवाद और लोकायुक्त की जांच

1991 में सतीश चंद्र कॉलेज के छात्रसंघ महामंत्री से अपने सियासी सफर की शुरुआत करने वाले उमाशंकर सिंह ने 2009 में अपनी कंस्ट्रक्शन कंपनी भी बनाई. 2012 में विधायक रहते हुए पीडब्ल्यूडी से सरकारी ठेके लेने के आरोप में उनकी सदस्यता रद्द करने की नौबत भी आई थी, लेकिन जनता का प्यार कभी कम नहीं हुआ. आज उनके निधन से पूरा रसड़ा और बलिया जिला मायूस है, हर आंख नम है और लोग अपने इस ‘सितारे’ को अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि दे रहे हैं.



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