उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में संत परमहंस रामचंद्र दास महाराज की पुण्यतिथि कार्यक्रम के दौरान एक बेहद चर्चित वाकया साझा किया. उन्होंने बताया कि कैसे कुछ मौलवियों द्वारा गाय को ‘राष्ट्रीय पशु’ घोषित करने की मांग वाले ज्ञापन पर वे भौचक्के रह गए थे और उन्होंने फोन करके उन मौलवियों को क्या जवाब दिया था.
‘गाय पशु नहीं, सनातन धर्म की माता’
सीएम योगी ने अपने संबोधन में कहा, ‘बीते दिनों कुछ मौलवी ज्ञापन देने आए थे, जिसमें गाय को ‘राष्ट्रीय पशु’ बनाने की मांग थी. मैंने उनसे पूछा कि गाय तो हमारी माता है—’गावो विश्वस्य मातरः’, फिर आपने उन्हें ‘पशु’ क्यों कहा? अगर यही शब्द मैं आपके लिए इस्तेमाल करूं तो आपको कैसा लगेगा?’
योगी ने बताया कि जब मौलवियों ने इसे गलती माना, तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि गौ-माता की सेवा और पूजा का तरीका हमें सिखाने के बजाय यदि आप अपनी कौम को गौ-तस्करी रोकने का उपदेश दें, तो हमारी पुलिस का समय बचेगा.
‘बंटे थे, इसलिए कटे थे’
अयोध्या और संभल का जिक्र करते हुए सीएम योगी ने सामाजिक एकता का बड़ा संदेश दिया. उन्होंने कहा कि 1526 में संभल के हरिहर मंदिर को नुकसान पहुंचाया गया और यदि तभी एकजुट होकर इसका विरोध किया जाता, तो 1528 में अयोध्या में वही दुस्साहस दोहराने की हिम्मत कोई नहीं करता.
उन्होंने तीखा हमला बोलते हुए कहा, ‘इतिहास गवाह है कि हमारे पास बल और वैभव की कमी नहीं थी, कमी थी तो सिर्फ एकता की. हम बंटे थे, इसलिए कटे थे. 14 अगस्त 1947 को भी केवल हिंदू-सिख नहीं कटे थे, बल्कि भारत का विभाजन हुआ था.’
विपक्ष और ‘मंथराओं’ पर साधा निशाना
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर फेक अकाउंट्स के जरिए जातियों को आपस में लड़ाने की साजिशों से सतर्क रहने को कहा. साथ ही उन्होंने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि जब मथुरा-वृंदावन के विकास की बात आई, तो समाजवादी पार्टी ने भगवान कृष्ण के बजाय कंस की मूर्ति लगाने की बात कही थी. उन्होंने रामभक्तों को सतर्क रहने की सलाह देते हुए कहा कि जैसे बजरंगबली ने कालनेमि को पहचाना था, वैसे ही आज समाज को सनातन विरोधी ताकतों को पहचानना होगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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