Bharat Express DD Free Dish
Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital
Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital

कोडीन कफ सिरप तस्करी केस में बड़ा खुलासा, बिहार-बंगाल-बांग्लादेश तक जुड़े तार

वाराणसी में कोडीन युक्त कफ सिरप तस्करी के मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है. 23 करोड़ रुपये के फर्जी लेन-देन का पता चला है और पांच आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है. जांच में कागजों पर बनी कंपनियों और अंतरराज्यीय नेटवर्क की परतें खुलती जा रही हैं.

codeine cough syrup smuggling

Codeine Cough Syrup Smuggling: बिमलेन्द्र राय/वाराणसी: वाराणसी में कोडीन युक्त कफ सिरप की तस्करी को लेकर पुलिस को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है. Varanasi Commissionerate Police ने इस मामले में पांच आरोपितों को गिरफ्तार करते हुए करीब 23 करोड़ रुपये के फर्जी और अवैध लेन-देन का खुलासा किया है. जांच में सामने आया है कि यह पूरा नेटवर्क कागजों पर बनी फर्जी कंपनियों के सहारे चलाया जा रहा था और इसके तार कफ सिरप तस्करी के मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल से जुड़े हुए हैं.

रोहनिया और सारनाथ से हुई गिरफ्तारी

पुलिस के मुताबिक, वरुणा जोन की टीम ने रोहनिया थाना क्षेत्र से तीन और सारनाथ थाना क्षेत्र से दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है. रोहनिया से पकड़े गए लोगों में स्वप्निल केशरी, दिनेश यादव और आशीष यादव शामिल हैं, जबकि सारनाथ क्षेत्र से विष्णु पांडेय और लोकेश अग्रवाल को हिरासत में लिया गया है. पूछताछ में सामने आया कि ये सभी मिलकर अवैध शेल कंपनियां बनाते थे और उन्हीं के जरिए फर्जी भुगतान और लेन-देन को अंजाम देते थे.

कागजों पर कंपनियां, असल में कोई कारोबार नहीं

जांच में यह बात साफ हुई है कि जिन कंपनियों के नाम पर करोड़ों का लेन-देन दिखाया जा रहा था, वे असल में सिर्फ कागजों पर ही मौजूद थीं. इन कंपनियों ने जीएसटी नंबर और ड्रग लाइसेंस तो हासिल कर लिया था, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई खरीद-फरोख्त नहीं होती थी. एसबी फार्मा, अल उकबा, सिंह मेडिकोज और पीडी फार्मा जैसे नामों से ये फर्म संचालित हो रही थीं. दफ्तर के नाम पर सिर्फ एक कमरा, टेबल और कुर्सी थी, जबकि असली खेल फर्जी बिल और इनवॉइस के जरिए चल रहा था.

करोड़ों का कैश और RTGS ट्रांजैक्शन

पुलिस पूछताछ में सामने आया कि पीडी फार्मा के खाते में करीब 13 करोड़ रुपये कैश के रूप में जमा किए गए थे. वहीं सारनाथ से जुड़ी कंपनियों में 6 से 7 करोड़ रुपये कैश और 3 से 4 करोड़ रुपये आरटीजीएस के जरिए ट्रांसफर किए गए. यह पैसा अंत में कुछ खास खातों में पहुंचाया जाता था, जिससे पूरे नेटवर्क का संचालन होता था.

बिहार, बंगाल और बांग्लादेश तक फैला नेटवर्क

पुलिस के अनुसार, इस तस्करी नेटवर्क का सीधा संबंध बिहार, पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश से जुड़ा हुआ है. इन इलाकों में कफ सिरप की कीमत कई गुना ज्यादा होती है. वहां से आने वाला पैसा कभी सोने के रूप में तो कभी हवाला के जरिए नकद वाराणसी पहुंचाया जाता था.

दवा मंडी से शुरू हुई पहचान

पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि उनकी मुलाकात वाराणसी की सप्तसागर दवा मंडी में हुई थी. यहीं से शुभम जायसवाल के संपर्क में आए और उसने मेडिकल फर्म खोलने से लेकर तस्करी तक के तरीके सिखाए. इसके बाद चंदौली जिले में कई मेडिकल एजेंसियां खोली गईं और कफ सिरप को गुप्त रूप से स्टोर कर अलग-अलग जिलों में सप्लाई किया जाने लगा.

अहम दस्तावेज और सामान बरामद

पुलिस ने आरोपितों के पास से चेकबुक, पीडी फार्मा की मोहर, लेटर पैड, हस्ताक्षरित बिल, एटीएम कार्ड, लैपटॉप और मोबाइल फोन बरामद किए हैं. पुलिस का कहना है कि इस मामले में और भी नाम सामने आए हैं, जिनकी तलाश जारी है. जांच आगे बढ़ने के साथ और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है.

ये भी पढें: गोरखपुर का ‘दारोगा’… 11 साल से फर्स्ट ईयर में फंसा MBBS स्टूडेंट, गोरखपुर मेडिकल कॉलेज का अनोखा मामला

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read


Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital