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भूत बनकर आई हूं? जिंदा को मारकर रोकी पेंशन, रोती रही विधवा..! फिरोजाबाद में अंधेरगर्दी

Firozabad Widow Pension Case: फिरोजाबाद में प्रशासन की बड़ी लापरवाही सामने आई है. यहां जीवित विधवा रामरती को कागजों में मृत घोषित कर पेंशन रोकी गई. हालांकि, जब वह अधिकारी के पास पहुंची को कुछ शर्माक हो गया. पढ़ें पूरी रिपोर्ट

Shocking Negligence in Firozabad Alive Widow Declared Dead Pension Stopped

AI से बनाई गई फोटो

Firozabad Widow Pension Case: फिरोजाबाद | उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद में प्रशासनिक लापरवाही का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने इंसानियत और सिस्टम दोनों को शर्मसार कर दिया है. यहां एक विधवा बुजुर्ग महिला पिछले दो साल से सरकारी दफ्तरों में अपनी ही ‘सांसों का सबूत’ दे रही है. दरअसल, प्रशासन ने बिना किसी जांच-पड़ताल के इस जीवित महिला को सरकारी दस्तावेजों में ‘मृत’ घोषित कर दिया और उसकी विधवा पेंशन बंद कर दी. अब यह लाचार महिला डीएम चौखट पर न्याय की भीख मांग रही है.

बिना जांच के रोक दी पेंशन (Administrative Negligence in Firozabad)

मामला सदर तहसील के बरकतपुर गांव का है. यहां रहने वाली रामरती के पति नौबतराम की 2008 में मृत्यु हो गई थी. तब से उन्हें जिला प्रोबेशन कार्यालय से विधवा पेंशन मिल रही थी, जो एसबीआई की रामनगर शाखा में आती थी. लेकिन जुलाई 2023 में जिला प्रोबेशन अधिकारी ने एक तुगलकी फरमान जारी किया. बिना किसी भौतिक सत्यापन के रामरती को फाइलों में मृत दिखा दिया गया और बैंक को आदेश दिया गया कि उनके खाते में पड़ी पेंशन की रकम की रिकवरी की जाए.

सामने खड़ी थी फिर भी मृत माना (Widow Pension Scam Firozabad)

पीड़िता का दर्द यह है कि जब उसे पेंशन रुकने का पता चला तो वह खुद जिला प्रोबेशन अधिकारी के पास पहुंची. उसने अधिकारी के सामने खड़े होकर कहा कि साहब, मैं आपके सामने जिंदा खड़ी हूं, तो मैं मर कैसे गई? लेकिन सिस्टम का दिल नहीं पसीजा. आरोप है कि कर्मचारियों ने उसके साथ अभद्र व्यवहार किया और उसे भगा दिया.

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डीएम से लगाई गुहार (Firozabad Probation Office Apathy)

बीते दो सालों से यह बुजुर्ग महिला कभी बैंक तो कभी विकास भवन के चक्कर काट रही है. थक-हारकर अब रामरती ने जिलाधिकारी (DM) को शिकायती पत्र सौंपा है. उन्होंने मांग की है कि लापरवाह अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए और उनकी रुकी हुई पेंशन ब्याज समेत वापस दी जाए. यह घटना बताती है कि कैसे एक कागजी गलती किसी गरीब के जीवन पर भारी पड़ सकती है.



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