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कावड़ यात्रा से पहले फिर गर्माया ‘नेम प्लेट’ विवाद, योगी के मंत्री बोले- ‘बाहर गणेश ढाबा और अंदर नॉनवेज… यह बर्दाश्त नहीं’

30 जुलाई से शुरू हो रही कावड़ यात्रा से पहले उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में दुकानों पर नेम प्लेट लगाने का विवाद दोबारा शुरू हो गया है. राज्य मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि ढाबों पर ऐसा नाम न हो जिससे शिवभक्तों में भ्रम फैले.

Kanwar Yatra 2026, Muzaffarnagar, Uttar Pradesh

Kanwar Yatra 2026: उत्तर प्रदेश में सावन के महीने की शुरुआत और कावड़ यात्रा के आगाज से ठीक पहले एक बार फिर ‘नेम प्लेट’ का पुराना और चर्चित मुद्दा गरमा गया है. पिछली कावड़ यात्रा के दौरान दुकानों और ढाबों पर नाम लिखने को लेकर जो भारी विवाद खड़ा हुआ था उसकी यादें अभी धुंधली भी नहीं हुई थीं कि योगी सरकार के राज्य मंत्री कपिल देव अग्रवाल के एक ताजा बयान ने इस बहस को दोबारा हवा दे दी है. मुजफ्फरनगर में मीडिया से बात करते हुए मंत्री ने साफ लहजे में कहा है कि यह नियम सिर्फ कावड़ यात्रा के दिनों के लिए नहीं बल्कि पूरे 12 महीने के लिए लागू होना चाहिए.

मंत्री कपिल देव अग्रवाल का कहना है कि यह पूरा रूट हरिद्वार, ऋषिकेश, गोमुख, बद्रीनाथ और केदारनाथ जैसे पवित्र तीर्थ स्थलों की तरफ जाता है. देश भर से लोग अपने परिवार, मां-बहनों के साथ इन रास्तों से गुजरते हैं. ऐसे में किसी भी ढाबे या रेस्टोरेंट का नाम ऐसा नहीं होना चाहिए जिससे आम जनता या श्रद्धालुओं के बीच किसी तरह का भ्रम पैदा हो.

‘बाहर कुछ और, अंदर कुछ… यह नहीं चलेगा’

अपने बयान को और स्पष्ट करते हुए मंत्री ने कहा, “पिछली बार इस मुद्दे पर काफी विवाद हुआ था और माहौल में थोड़ा तनाव भी देखने को मिला था. इसलिए मेरा सभी ढाबा और रेस्टोरेंट संचालकों से सीधा अनुरोध है कि वे अपनी दुकान का कोई ऐसा नाम न रखें जिससे सच छिप जाए. अगर बाहर गणेश ढाबा लिखा हो और अंदर नॉनवेज परोसा जा रहा हो, तो यह सीधे-सीधे विवाद को न्योता देना है. जो लोग नॉनवेज बेचते हैं वे अपनी दुकान के बाहर साफ-साफ अक्षरों में लिखें कि यहां नॉनवेज मिलता है.” उन्होंने सख्त लहजे में जोड़ा कि श्रद्धालुओं की भावनाओं के साथ खिलवाड़ न तो पहले बर्दाश्त किया गया था और न ही आगे बर्दाश्त किया जाएगा.

प्रशासन को मुस्तैद रहने के निर्देश

मंत्री ने बताया कि इस बार यात्रा को शांतिपूर्ण और बिना किसी विवाद के संपन्न कराने के लिए मुजफ्फरनगर के जिलाधिकारी और SSP को जरूरी निर्देश दे दिए गए हैं. प्रशासन से कहा गया है कि वे सभी विधायकों, सांसदों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर एक समन्वय बैठक करें ताकि कावड़ियों को किसी तरह की असुविधा न हो.

मंत्री के मुताबिक हिंदू समाज में जो लोग आम दिनों में शाकाहारी नहीं भी होते वे भी इस पवित्र यात्रा के समय पूरी तरह शाकाहारी हो जाते हैं. ऐसे में उनकी आस्था को ठेस न पहुंचे इसकी पूरी जिम्मेदारी अधिकारियों की है.

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मुजफ्फरनगर है करोड़ों कावड़ियों का मुख्य रास्ता

आपको बता दें कि उत्तराखंड के हरिद्वार और हर की पौड़ी से गंगाजल लेकर आने वाले लाखों-करोड़ों शिवभक्त दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और पश्चिमी यूपी के अलग-अलग जिलों के लिए मुजफ्फरनगर के रास्ते ही आगे बढ़ते हैं. उत्तर भारत के इस सबसे बड़े धार्मिक मेले को लेकर स्थानीय हिंदूवादी संगठनों का भी लंबे समय से यही मानना रहा है कि कावड़ मार्ग के सभी होटलों, खान-पान की दुकानों और रेहड़ियों पर उनके मालिकों के नाम और मिलने वाले खाने की पूरी जानकारी साफ तौर पर दिखनी चाहिए.

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-भारत एक्सप्रेस



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