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अमरोहा में फर्जीवाड़ा क्रिकेटर मो. शमी की दीदी-जीजा मनरेगा मजदूर, MBBS छात्र-वकील-इंजीनियर को भी मिल रहा मजदूरी का पैसा

MNREGA Fraud: अमरोहा के जोया ब्लॉक का गांव है पलौला यहां मनरेगा योजना में 657 जॉब कार्ड बने हुए हैं. इनमें से करीब 150 एक्टिव कार्ड हैं. इस लिस्ट में 473वें नंबर पर शबीना पत्नी गजनबी का नाम है.

मनरेगा मजदूर

Edited by Akansha

रिपोर्ट अरुण चहल-अमरोहा 

यूपी के अमरोहा के एक गांव में मनरेगा योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है. करोड़पति ग्राम प्रधान ने अपने परिवार के सभी सदस्यों, जानने वालों और चहेतों को मजदूर बना दिया. बाकायदा इनके खाते में पैसा आया और निकाला भी गया. इनमें सबसे बड़ा नाम भारतीय क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी की बहन शबीना और जीजा गजनबी का है. वकील, MBBS छात्र, ठेकेदार, इंजीनियर जैसे लोगों के नाम पर भी मजदूरी के जॉब कार्ड बने हैं. उन्हें भुगतान भी किया जा रहा है.

मनरेगा योजना में बने हुए है 657 जॉब कार्ड

दरअसल अमरोहा के जोया ब्लॉक का गांव है पलौला यहां मनरेगा योजना में 657 जॉब कार्ड बने हुए हैं. इनमें से करीब 150 एक्टिव कार्ड हैं. इस लिस्ट में 473वें नंबर पर शबीना पत्नी गजनबी का नाम है. शबीना क्रिकेटर मोहम्मद शमी की बहन और मौजूदा प्रधान गुले आइशा की पुत्र-वधू हैं. रिकॉर्ड के अनुसार, शबीना का मनरेगा योजना में 4 जनवरी, 2021 को रजिस्ट्रेशन हुआ था.  21 मार्च, 2022 से 23 जुलाई, 2024 तक शबीना ने मनरेगा में 374 दिन मजदूरी की है. इसके बदले शबीना के SBI खाते में करीब 70 हजार रुपए आए हैं.

शबीना के पति गजनबी भी है मनरेगा मजदूर

रिकॉर्ड के अनुसार, शबीना के पति गजनबी भी मनरेगा मजदूर हैं. रिकॉर्ड में लिखा है कि इन्होंने साल 2021 से 2024 तक करीब 300 दिन मजदूरी की. इस काम के बदले उनके खाते में करीब 66 हजार रुपए आए. जॉब कार्ड लिस्ट में 576 नंबर पर नेहा का नाम है. ये ग्राम प्रधान गुले आइशा की बेटी है. साल 2019 में निकाह होने के बाद गांव से करीब 7 किलोमीटर दूर पति के साथ कस्बा जोया में रह रही है. इसका भी मनरेगा मजदूरी कार्ड बना है.

563 नंबर पर शहजर का नाम

साल 2022 से 2024 तक इसके खाते में भी काफी पैसा आया है. 563 नंबर पर शहजर का नाम है, जो प्रधान-पति शकील का सगा भाई है. गांव से कई किलोमीटर दूर अमरोहा में इसकी एग्रीकल्चर शॉप है. इसके बावजूद ऑन रिकॉर्ड ये मनरेगा मजदूर है. मनरेगा जॉब कार्ड लिस्ट में 482 नंबर पर जुल्फिकार का नाम है, जो ठेकेदार है. गांव में इसका दो मंजिला मकान है. ठेकेदार जुल्फिकार का बेटा अजीम भी मनरेगा मजदूर दर्शाया हुआ है, जबकि ये एक फैक्ट्री में इंजीनियर है.

MBBS छात्र को भी मिल रहा मजदूरी का पैसा

किराना की दुकान चलाने वाले इमरान बताते हैं- प्रधान ने अपनी बहू-बेटे और रिश्तेदारों समेत तमाम लोगों के मनरेगा कार्ड बनवाए हैं. एक बेटा MBBS की पढ़ाई कर रहा है. उसके खाते में पैसा आ रहा है. सैकड़ों खातों में फर्जी तरह से पैसा भेजकर सरकारी पैसे का दुरुपयोग किया जा रहा है. अगर कोई मनरेगा के तहत मजदूरी करना चाहता है, तो योजना के लिए आवेदन गांव की ग्राम पंचायतों में दिए जाते हैं.

ग्राम पंचायत की है निगरानी की जिम्मेदारी

ग्राम पंचायत का यह कर्तव्य है कि वो आवेदन का सत्यापन करे. इसके बाद मजदूर को जॉब कार्ड जारी होता है. इसमें घर के सभी वयस्क सदस्यों का विवरण उनकी तस्वीरों के साथ दर्ज होता है. अगर जानकारी गलत है तो कार्यक्रम अधिकारी को ये अधिकार होता है कि वो जॉब कार्ड डिलीट करवा सकता है. मजदूर ने कितना काम किया है, इसकी निगरानी की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत की है. वो काम उनके जॉब कार्ड पर चढ़ाया जाता है. सबसे आखिर में ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर (BDO) उस जॉब कार्ड को NOC देते हैं, तब जाकर मजदूर का पैसा उसके खाते में पहुंचता है.

-भारत एक्सप्रेस  



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