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नशे की कमाई से खड़ा किया था साम्राज्य, मुजफ्फरनगर पुलिस ने तोड़ी आर्थिक कमर; करोड़ो रुपये की प्रॉपर्टी को किया सीज

मुजफ्फरनगर पुलिस ने नशे के सौदागरों पर बड़ा वार करते हुए ड्रग्स तस्करी में शामिल दो सगे भाइयों की करीब 4 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त कर ली है.

रिपोर्ट- नीरज त्यागी


मुजफ्फरनगर पुलिस इन दिनों एक्शन मोड में है और जिले के अपराधियों के बीच हड़कंप मचा हुआ है. मामला नशे के सौदागरों से जुड़ा है. मुजफ्फरनगर की मीरापुर थाना पुलिस ने ड्रग्स तस्करी के धंधे में शामिल दो सगे भाइयों की करीब 4 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त कर ली है. मंगलवार को जब पुलिस ढोल-नगाड़े लेकर मुनादी करने निकली, तो पूरे इलाके में यह चर्चा का विषय बन गया है.

नशे के जाल से बनाया था साम्राज्य

यह कहानी है लोकेंद्र और योगेंद्र नाम के दो भाइयों की, जो बुढ़ाना कोतवाली क्षेत्र के मंदवाड़ा गांव के रहने वाले हैं. कहने को तो ये सगे भाई थे, लेकिन इनका असली धंधा युवाओं की नसों में जहर घोलना था. पिछले साल 9 सितंबर को मीरापुर पुलिस ने इन्हें लाखों रुपये के नशीले पदार्थों के साथ रंगे हाथों दबोचा था. तब से ये दोनों सलाखों के पीछे हैं, लेकिन पुलिस की जांच यहीं नहीं रुकी. जांच में पता चला कि इन भाइयों ने तस्करी के जरिए न केवल खुद के लिए, बल्कि अपने परिवार के नाम पर भी आलीशान मकान और जमीनें इकट्ठा कर ली थीं.

मंगलवार को नजारा देखने लायक था. पुलिस की टीम भारी फोर्स के साथ इनके ठिकानों पर पहुंची. इलाके में ढोल बजवाकर बाकायदा घोषणा की गई कि अब यह संपत्ति सरकारी कब्जे में है. एनडीपीएस एक्ट की धारा 68(F) के तहत की गई इस कार्रवाई में इनके मकान और जमीनें सीज कर दी गई हैं. प्रशासन का संदेश साफ है—अगर अपराध से संपत्ति बनाई है, तो उसे गंवाने के लिए भी तैयार रहें.

क्या बोले कप्तान?

मुजफ्फरनगर के एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने इस कार्रवाई पर विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने बताया कि ‘ऑपरेशन सवेरा’ के तहत नशे के कारोबारियों पर नकेल कसी जा रही है. एसएसपी के मुताबिक, जिलाधिकारी के आदेश पर 22 जनवरी 2026 को इस जब्ती की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया गया था. लोकेंद्र और योगेंद्र ने अपराध के रास्ते जो 4 करोड़ की प्रॉपर्टी खड़ी की थी, उसे अब व्यावहारिक रूप से कुर्क कर लिया गया है.

मुजफ्फरनगर पुलिस की इस रणनीति ने अपराधियों की नींद उड़ा दी है. अब पुलिस का फोकस सिर्फ जेल भेजने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह अपराधियों की ‘इकोनॉमिक बैकबोन’ यानी उनकी आर्थिक ताकत को तोड़ रही है. पुलिस का मानना है कि जब तक अपराधियों के पास पैसा रहेगा, वे जेल के अंदर या बाहर से अपना नेटवर्क चलाते रहेंगे. लेकिन जब उनकी तिजोरियां खाली हो जाएंगी, तो जुर्म का यह साम्राज्य अपने आप ढह जाएगा.

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-भारत एक्सप्रेस



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