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‘वरना अब तक बुलडोजर चल गया होता…’ आचार्य प्रमोद कृष्णम ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर ये क्या कह दिया?

Acharya Pramod Krishnam Statement: संभल में आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि सीएम योगी शंकराचार्य का सम्मान करते हैं, वरना अब तक बुलडोजर चल गया होता. इस बयान ने मचाई हलचल.

Acharya Pramod Krishnam Statement On CM Yogi shankaracharya avimukteshwaranand

Acharya Pramod Krishnam Statement: कल्कि धाम के पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को लेकर एक ऐसा बयान दिया है, जिसने सियासी और धार्मिक गलियारों में हलचल मचा दी है. संभल में मीडिया से मुखातिब होते हुए आचार्य प्रमोद कृष्णम ने अपनी बेबाक शैली में कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ संतों और शंकराचार्य के पद का गहरा सम्मान करते हैं, यदि ऐसा नहीं होता, तो अब तक उन पर भी ‘बुलडोजर’ चल गया होता.

‘बुलडोजर’ वाले बयान के मायने

आचार्य प्रमोद कृष्णम का यह बयान ऐसे समय में आया है जब विभिन्न धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के बयान सुर्खियों में रहे हैं. आचार्य कृष्णम ने परोक्ष रूप से यह संकेत दिया कि उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था और प्रशासन का रुख बेहद सख्त है. हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सीएम योगी आदित्यनाथ स्वयं एक संत परंपरा (गोरक्षपीठ) से आते हैं. इसलिए वे संतों की मर्यादा और सम्मान का पूरा ख्याल रखते हैं. आचार्य ने कहा-

‘मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद जी का सम्मान करते हैं, यह उनकी महानता और भारतीय संस्कृति के प्रति निष्ठा है. वरना प्रशासन जिस सख्ती के लिए जाना जाता है, उसके तहत अब तक बुलडोजर चल गया होता.’

संतों का सम्मान ही संस्कृति की पहचान

आचार्य प्रमोद कृष्णम ने अपने बयान में भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा की दुहाई दी. उन्होंने कहा कि संतों का सम्मान करना भारतीय संस्कृति की मूल पहचान है और योगी सरकार इसी परंपरा का पालन कर रही है. उन्होंने जोर देकर कहा कि सत्ता और धर्म के बीच एक मर्यादा होनी चाहिए, जिसका पालन वर्तमान सरकार कर रही है.

टकराव नहीं, संवाद का रास्ता चुनें

बातचीत के दौरान आचार्य प्रमोद कृष्णम ने सलाह देते हुए कहा कि धर्म और आस्था के मामले बेहद संवेदनशील होते हैं. ऐसे में सरकार और धार्मिक नेतृत्व, दोनों को ही संयम और संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि किसी भी विवाद का हल टकराव से नहीं, बल्कि संवाद से ही निकल सकता है. आचार्य प्रमोद कृष्णम के इस बयान को राजनीतिक विश्लेषक कई नजरिए से देख रहे हैं. एक तरफ इसे सीएम योगी की ‘संत-हृदय’ छवि के समर्थन के रूप में देखा जा रहा है, तो दूसरी तरफ इसे इशारों-इशारों में शंकराचार्य को दी गई नसीहत भी माना जा रहा है.



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