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नोएडा के चाइल्ड पीजीआई में बड़ा हादसा: वार्ड में बेड के ऊपर भरभराकर गिरी छत, बाल-बाल बचा मासूम

नोएडा के सेक्टर-30 स्थित चाइल्ड PGI अस्पताल में वार्ड की छत का हिस्सा मरीज के बेड पर गिर गया. हादसे में बच्चा बाल-बाल बच गया, जबकि घटना के बाद अस्पताल की सुरक्षा और रखरखाव पर गंभीर सवाल उठ गए…

Edited by Sahil Singh

 

दिल्ली से सटे हाईटेक शहर नोएडा के सेक्टर-30 स्थित सुपर स्पेशलिटी पीडियाट्रिक हॉस्पिटल यानी चाइल्ड पीजीआई से आज एक ऐसी रूह कंपा देने वाली खबर सामने आई है जिसने सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. अस्पताल के एक व्यस्त वार्ड में मरीजों के बेड के ऊपर अचानक छत का एक बहुत बड़ा हिस्सा भरभराकर नीचे गिर गया. जिस वक्त यह हादसा हुआ, उस बेड पर एक मासूम बच्चा लेटा हुआ था, जो इस मलबे की चपेट में आने से बाल-बाल बच गया.

छत गिरने की गूंज और मलबे की आवाज सुनते ही पूरे वार्ड में चीख-पुकार मच गई और तीमारदारों से लेकर नर्सिंग स्टाफ के बीच महा-अफरातफरी का माहौल पैदा हो गया. गनीमत रही कि मलबे की सीधी मार बच्चे पर नहीं पड़ी, वरना कोई भी बड़ा और जानलेवा अनहोनी का होना लगभग तय था.

मौत को छूकर निकला मासूम

घटना के वक्त वार्ड का नजारा बेहद डरावना था क्योंकि किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि बच्चों के इस वीआईपी सरकारी अस्पताल की छत इतनी खोखली हो चुकी है. चश्मदीदों के मुताबिक, जैसे ही कंक्रीट का भारी-भरकम प्लास्टर और छत का हिस्सा सीधे मरीज के बेड पर गिरा, चारों तरफ धूल का गुबार छा गया. बेड पर मौजूद मासूम को उसकी मां ने बिजली की फुर्ती से अपनी तरफ खींचा, जिससे उसकी जान बच सकी.

इस हादसे ने वहां मौजूद अन्य बीमार बच्चों के माता-पिता के रोंगटे खड़े कर दिए. लोग अपने-अपने बच्चों को गोद में उठाकर वार्ड से बाहर की तरफ भागने लगे, जिससे अस्पताल के गलियारों में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई. अस्पताल प्रशासन तुरंत हरकत में आया और आनन-फानन में उस पूरे वार्ड को खाली कराकर मरीजों को दूसरे सुरक्षित वार्डों में शिफ्ट किया गया.

करोड़ों के बजट पर उठे गंभीर सवाल

चाइल्ड पीजीआई में हुए इस खौफनाक हादसे के बाद अस्पताल की मुख्य बिल्डिंग के निर्माण और उसकी गुणवत्ता पर बेहद गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. यह अस्पताल पूरे उत्तर प्रदेश में बच्चों के इलाज के लिए एक प्रमुख केंद्र माना जाता है, जिसके रखरखाव और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए हर साल सरकार की तरफ से करोड़ों रुपये का भारी-भरकम बजट जारी किया जाता है. इसके बावजूद वार्डों की छतें इस कदर जर्जर हो चुकी हैं कि वह खुद-ब-खुद टूटकर गिर रही हैं.

स्थानीय लोगों और मरीजों के परिजनों का आरोप है कि मेंटेनेंस के नाम पर सिर्फ लीपापोती की जाती है, जिसके कारण आज मासूम मरीजों की सुरक्षा भगवान भरोसे छोड़ दी गई है. इस लापरवाही ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण सामग्री का खामियाजा अंततः आम जनता और बेकसूर बच्चों को भुगतना पड़ता है.

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सरकारी सिस्टम पर बड़ा सवालिया निशान

हादसे की सूचना जैसे ही सेक्टर-20 थाना क्षेत्र की पुलिस को मिली, महकमे में हड़कंप मच गया और पुलिस की एक टीम तुरंत स्थिति का जायजा लेने चाइल्ड पीजीआई पहुंच गई. पुलिस और स्थानीय प्रशासन अब इस पूरे मामले की जांच और दुर्घटना के मुख्य कारणों का पता लगाने में जुट गए हैं. लेकिन इस हादसे ने पूरे सरकारी सिस्टम पर एक बहुत बड़ा और कड़वा सवालिया निशान लगा दिया है कि आखिर हमारे देश और प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में ऐसे जानलेवा हादसे कब रुकेंगे?

क्या प्रशासन किसी मासूम की जान जाने के बाद ही जागने का इंतजार करता है? फिलहाल अस्पताल परिसर में तनाव और भारी आक्रोश का माहौल है और पीड़ित परिवार के साथ-साथ आम जनता भी जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग कर रही है.

-भारत एक्सप्रेस



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