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Sambhal Mosque Demolition: संभल/अंसार मलिक: उत्तर प्रदेश के संभल जिले में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे के खिलाफ प्रशासन का सख्त रुख बरकरार है. ताजा मामला असमोली थाना क्षेत्र के मुबारकपुर बंद गांव का है, जहां प्रशासन के ‘बुलडोजर’ के खौफ से ग्रामीणों ने खुद ही अवैध रूप से बनी मस्जिद, मदरसे और दुकानों को ध्वस्त करना शुरू कर दिया है.
बुलडोजर के डर से खुद चलाया हथौड़ा
मुबारकपुर बंद गांव में करीब साढ़े तीन बीघा सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे का मामला सामने आया था. राजस्व विभाग की जांच में पुष्टि हुई कि इस जमीन पर मस्जिद, मदरसा और कई दुकानों का निर्माण किया गया था. तहसील प्रशासन द्वारा पैमाइश और वीडियोग्राफी कराने के बाद जब ध्वस्तीकरण का अल्टीमेटम दिया गया, तो ग्रामीण कार्रवाई के डर से खुद ही हथौड़ा लेकर अपने बनाए ढांचों को गिराने में जुट गए. ग्रामीणों का कहना है कि वे भारी मन से ऐसा कर रहे हैं ताकि प्रशासन की ओर से होने वाली बड़ी कानूनी कार्रवाई से बचा जा सके.
तहसीलदार ने किया मौके का मुआयना
घटना की सूचना मिलते ही तहसीलदार संभल धीरेंद्र कुमार सिंह राजस्व और चकबंदी विभाग की टीम के साथ मौके पर पहुँचे. उन्होंने ग्रामीणों द्वारा किए जा रहे ध्वस्तीकरण कार्य का निरीक्षण किया. तहसीलदार ने स्पष्ट किया कि यह निर्माण पूरी तरह अवैध था और सरकारी अभिलेखों में दर्ज जमीन पर कब्जा करके बनाया गया था. प्रशासन की मौजूदगी में अब मलबे को हटाने और जमीन को कब्जा मुक्त कराने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है.
30 साल का हिसाब और भारी जुर्माना
प्रशासन केवल जमीन खाली कराने तक ही सीमित नहीं है. तहसीलदार धीरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि अवैध कब्जे की अवधि का आकलन किया जा रहा है. पिछले 30 वर्षों से इस सरकारी जमीन का उपयोग करने के बदले में संबंधित पक्षों पर भारी आर्थिक जुर्माना (रिकवरी) लगाया जाएगा. राजस्व विभाग की टीम जमीन के बाजार मूल्य और कब्जे के समय के आधार पर जुर्माने की राशि तय करेगी, जो लाखों में होने का अनुमान है.
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संभल में थमती नहीं दिख रही कार्रवाई
संभल जिले में इस साल की शुरुआत से ही धार्मिक स्थलों और अवैध निर्माणों पर कार्रवाई का सिलसिला जारी है. जनवरी 2026 में ही प्रशासन ने अलग-अलग क्षेत्रों में करीब 17 मस्जिदों और मदरसों को चिन्हित कर ध्वस्त किया था. 4 जनवरी को सलेमपुर सालार और हाजीपुर में हुई बड़ी कार्रवाई के बाद अब मुबारकपुर बंद गांव का मामला चर्चा में है. प्रशासन का कहना है कि यह अभियान किसी समुदाय विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि सरकारी संपत्तियों को सुरक्षित करने का एक हिस्सा है.
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