उत्तर प्रदेश में पुलिस और कानून व्यवस्था पर से भरोसा एक बार फिर हिल गया है. सीबीआई ने केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN), लखनऊ के दो इंस्पेक्टर- महिपाल सिंह और रवि रंजन सहित एक निजी नर्सिंग होम के मालिक गयासुद्दीन अहमद को 10 लाख रुपये की रिश्वत मामले में गिरफ्तार किया है.
10 लाख रुपये की रिश्वत रंगे हाथों बरामद
सीबीआई की एफआईआर के अनुसार, दोनों इंस्पेक्टरों ने नर्सिंग होम संचालक को धमकाया कि उसे प्रतिबंधित दवा खरीदने के फर्जी केस में फंसा दिया जाएगा. दबाव डालकर उन्होंने मोटी रकम की मांग की. अंततः 10 लाख रुपये की रिश्वत ली गई, जिसे सीबीआई ने रंगे हाथों बरामद कर लिया.
जांच एजेंसी ने 26 अगस्त 2025 को इस मामले में केस दर्ज किया था और विश्वसनीय सूचना के आधार पर जाल बिछाकर दोनों अफसरों को रिश्वत लेते हुए पकड़ लिया. गयासुद्दीन अहमद, जिसने रिश्वत दी, उसे भी गिरफ्तार कर लिया गया है.
यह घटना कोई मामूली रिश्वतखोरी नहीं, बल्कि इस सच्चाई को उजागर करती है कि खाकी वर्दी में बैठे कुछ लोग ही कानून के सबसे बड़े दुश्मन बन गए हैं. जनता से न्याय की रक्षा करने वाले अधिकारी खुद जनता का शिकार कर रहे हैं.
अब बड़ा सवाल यह है कि जब कानून के रखवाले ही कानून तोड़ने लगें, तो आम आदमी इंसाफ की उम्मीद किससे करे?
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