अब उत्तर प्रदेश के गांवों में बनी गोशालाएं केवल पशुओं को रखने की जगह तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि ये हमारी लोक संस्कृति, परंपरा और ग्रामीण जीवन की असली पहचान बनने जा रही हैं. योगी सरकार के नए विजन के तहत राज्य की चुनिंदा गोशालाओं, कान्हा हाउस और बड़े गो-संरक्षण केंद्रों को ‘गो-पर्यटन’ (Cow Tourism) से जोड़ने की पूरी तैयारी कर ली गई है.
इस योजना का मुख्य मकसद यह है कि जब कोई सैलानी या बाहरी व्यक्ति गांव में आए, तो वह सिर्फ एक गोशाला न देखे, बल्कि वहां की मिट्टी की खुशबू, स्थानीय परंपराओं और ग्रामीण जीवनशैली को करीब से महसूस कर सके. हर इलाके की खूबी अलग होती है, इसलिए गो-पर्यटन का यह मॉडल हर जगह एक जैसा नहीं होगा. कहीं की लोक कला, कहीं का खास खान-पान तो कहीं ग्रामीण परिवेश इस पर्यटन का मुख्य आकर्षण बनेगा.
मांगलिक कार्यक्रमों के लिए खुलेंगे दरवाजे
इस नई व्यवस्था के तहत चुनिंदा गोशालाओं में सामाजिक और मांगलिक कार्यक्रमों के आयोजन की भी सुविधा दी जाएगी. यानी अब गोशालाएं केवल रोजमर्रा की देखरेख तक ही सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि गांवों के पारंपरिक और सांस्कृतिक आयोजनों का भी हिस्सा बनेंगी. इससे इन परिसरों का दायरा बढ़ेगा और ग्रामीण परिवेश के बीच लोग अपने पारंपरिक आयोजन आसानी से कर सकेंगे.
स्थानीय लोगों और कारीगरों के लिए रोजगार के नए रास्ते
जब गांवों में गो-पर्यटन शुरू होगा और बाहर से सैलानी आएंगे, तो इसका सीधा फायदा वहां के स्थानीय लोगों को मिलेगा. गांव के कारीगर, छोटे दुकानदार, स्वयं सहायता समूह (SHG) और खान-पान का व्यवसाय करने वाले लोगों के लिए कमाई के नए रास्ते खुलेंगे. जब पर्यटकों की आवाजाही बढ़ेगी, तो स्थानीय उत्पादों और कला की मांग भी बाजार में खुद-ब-खुद बढ़ेगी, जिससे गांवों की लोकल इकॉनमी मजबूत होगी.
ये भी पढ़ें- प्रेमिका के पीछे पहुंचा थाने, फिर ऐसा क्या हुआ कि बाथरूम में फंदे पर लटका प्रतापगढ़ का युवक?
Also Follow Bharat Express on Youtube
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.


